‘अफगानिस्तान से कोई आतंकी भारत नहीं आएगा’: अफगानी विदेश मंत्री से मुलाकात के बाद बोले मौलाना अरशद मदनी
‘अफगानिस्तान से कोई आतंकी भारत नहीं आएगा’: अफगानी विदेश मंत्री से मुलाकात के बाद बोले मौलाना अरशद मदनी
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी के साथ बैठक के बाद साफ कहा कि अफगानिस्तान से भारत में कोई आतंकी तत्व प्रवेश नहीं करेगा। उन्होंने दोनों देशों के ऐतिहासिक रिश्तों को रेखांकित करते हुए कहा कि यह भाईचारा शांति और सौहार्द पर आधारित है। यह बयान मुत्तकी के सात दिवसीय भारत दौरे के बीच आया, जो तालिबान शासन के वरिष्ठ अधिकारी के रूप में पहली बार भारत में हैं। मदनी ने इसे भारतीय मुसलमानों और अफगानिस्तान के बीच गहरे धार्मिक व शैक्षणिक संबंधों का प्रतीक बताया।
मुलाकात का महत्व: देवबंद में ऐतिहासिक स्वागत
अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी शुक्रवार को दिल्ली से सड़क मार्ग से देवबंद पहुंचे, जहां दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम (कुलपति) अबुल कासिम नोमानी, मौलाना अरशद मदनी और अन्य पदाधिकारियों ने उनका भव्य स्वागत किया। यह मुलाकात दारुल उलूम देवबंद के परिसर में हुई, जो विश्व प्रसिद्ध इस्लामी शिक्षा केंद्र है। मुत्तकी का यह दौरा भारत-अफगानिस्तान संबंधों को मजबूत करने का प्रयास माना जा रहा है, खासकर आतंकवाद विरोधी सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता के मुद्दों पर।
मौलाना अरशद मदनी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “अफगानिस्तान से कोई आतंकी भारत नहीं आएगा। दोनों देशों के रिश्ते केवल धार्मिक या शैक्षणिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक हैं। हमने विदेशी ताकतों के खिलाफ आजादी की लड़ाई साथ लड़ी है।” उन्होंने जोर दिया कि दुनिया के सभी देशों में धर्म से ऊपर उठकर सौहार्द और शांति होनी चाहिए।
मुत्तकी ने भी मुलाकात को सकारात्मक बताते हुए कहा कि अफगानिस्तान भारत के साथ आर्थिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाना चाहता है। उन्होंने दारुल उलूम देवबंद की प्रशंसा की, जो अफगान छात्रों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।
दोनों देशों के रिश्ते: भाईचारा और चुनौतियां
भारत और अफगानिस्तान के बीच सदियों पुराने रिश्ते हैं, जो बौद्ध काल से लेकर आधुनिक कूटनीति तक फैले हुए हैं। भारत ने तालिबान शासन के बाद भी अफगानिस्तान को मानवीय सहायता दी है, लेकिन आतंकवाद के मुद्दे पर सतर्कता बरतता रहा है। मदनी का बयान इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह अफगानिस्तान की ओर से आतंकवाद के खिलाफ आश्वासन का संकेत देता है।
– आतंकवाद पर स्टैंड: मदनी ने कहा कि अफगानिस्तान की नई सरकार शांति चाहती है, और भारत के साथ सहयोग से क्षेत्रीय स्थिरता बढ़ेगी।
– शैक्षणिक बंधन: दारुल उलूम देवबंद में सैकड़ों अफगान छात्र पढ़ते हैं। मुत्तकी ने इन संबंधों को मजबूत करने का वादा किया।
– क्षेत्रीय संदर्भ: यह मुलाकात मॉस्को फॉर्मेट कंसल्टेशंस के बाद आ रही है, जहां भारत ने अफगानिस्तान में विदेशी हस्तक्षेप के खिलाफ बयान दिया था।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: सकारात्मक, लेकिन सतर्क
भारतीय विदेश मंत्रालय ने मुलाकात को “उत्पादक” बताया, लेकिन आधिकारिक टिप्पणी से परहेज किया। विपक्षी नेता असदुद्दीन ओवैसी ने इसे “शांति की दिशा में कदम” कहा, जबकि BJP प्रवक्ता ने “आतंकवाद विरोधी प्रतिबद्धता” की सराहना की। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा तालिबान को अंतरराष्ट्रीय मान्यता की दिशा में भारत का व्यावहारिक कदम है।
निष्कर्ष: शांति की नई उम्मीद
मौलाना अरशद मदनी का यह बयान भारत-अफगानिस्तान संबंधों में नई गर्मजोशी का संकेत है। यदि आतंकवाद पर यह आश्वासन अमल में आया, तो दक्षिण एशिया में स्थिरता बढ़ सकती है। मुत्तकी का दौरा 16 अक्टूबर तक चलेगा, जिसमें मुंबई और चेन्नई भी शामिल हैं। दोनों पक्षों के बीच आगे की बैठकों से और स्पष्टता मिलेगी।
