अखिलेश-आजम की रामपुर में भावुक मुलाकात: हाथ थामे चले, यूपी सियासत में नई हलचल
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुधवार को रामपुर पहुंचकर पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान से 23 महीनों बाद पहली आमने-सामने मुलाकात की। जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में हेलीकॉप्टर से उतरते ही अखिलेश ने आजम को गले लगाया, नमस्ते किया और फिर हाथ थामकर उनके घर की ओर बढ़े। यह भावुक पल कैमरे में कैद हो गया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में दोनों नेता एक कार में सवार होते दिखे, जहां सिर्फ वे दोनों ही मौजूद थे। आजम ने शर्त रखी थी कि मुलाकात अकेले में होगी। यह तस्वीर यूपी की सियासत में सपा की एकजुटता का मजबूत संकेत दे रही है, लेकिन इसके पीछे कई रणनीतिक मायने छिपे हैं।
मुलाकात का पूरा विवरण
अखिलेश यादव सुबह 10:30 बजे लखनऊ से चार्टर प्लेन से बरेली एयरपोर्ट पहुंचे, जहां से सड़क मार्ग से रामपुर रवाना हुए। दोपहर करीब 12:30 बजे वे आजम के निवास पर पहुंचे। मुलाकात लगभग एक घंटे चली, जिसमें पार्टी की आंतरिक एकजुटता, 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति और मुस्लिम वोट बैंक को मजबूत करने पर चर्चा हुई। रामपुर सांसद मोहिबुल्लाह नदवी भी अखिलेश के साथ लखनऊ से आए थे, लेकिन मुलाकात में केवल अखिलेश और आजम ही थे।
आजम खान, जो 23 सितंबर को सीतापुर जेल से रिहा हुए थे, ने मुलाकात से पहले भावुक बयान दिया था: “मैं मुर्गी चोर हूं, परिवार पर 350 मुकदमे हैं, कितनी जिंदगी मांगूं खुदा से?” उन्होंने शर्त रखी कि अखिलेश अकेले आएं, परिवार का कोई सदस्य न मिले। मुलाकात के बाद अखिलेश बरेली होते हुए लखनऊ लौट गए। रामपुर प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे, और मीडिया को आजम के घर के अंदर जाने से रोका गया।
वायरल वीडियो में अखिलेश को आजम का हाथ थामे चलते देखा जा सकता है, जो सपा समर्थकों के बीच उत्साह बढ़ा रहा है।
यूपी सियासत में इस तस्वीर के मायने: 4 प्रमुख बिंदु
यह मुलाकात महज औपचारिक नहीं, बल्कि सपा की रणनीति का हिस्सा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसके राजनीतिक मायने निम्न हैं:
1. सपा की एकजुटता का संदेश: आजम खान पर 350 से अधिक मुकदमों के बावजूद उनकी रामपुर-मुरादाबाद बेल्ट में मजबूत पकड़ है। जेल से रिहाई के बाद अफवाहें उड़ीं कि वे BSP या ASP (चंद्रशेखर आजाद) की ओर झुक सकते हैं। यह मुलाकात उन कयासों को खत्म करती है और सपा के मुस्लिम-यादव वोट बैंक को एकजुट रखने का प्रयास है। अखिलेश ने कहा, “आजम जी हमारे अभिभावक हैं। पार्टी में सबकी एकता हमारी ताकत है।”
2. मायावती की रैली से एक दिन पहले रणनीतिक कदम: मुलाकात मायावती की लखनऊ में कांशीराम परिनिर्वाण दिवस (9 अक्टूबर) की रैली से ठीक पहले हुई। BSP मुस्लिम वोटों को ललचाने की कोशिश कर रही है। अखिलेश का यह दौरा मुस्लिम मतदाताओं को संदेश देता है कि सपा ही उनका असली साथी है। रामपुर लोकसभा उपचुनाव (2022) में आजम की अनुपस्थिति में सपा हारी थी; अब उनकी वापसी से पश्चिमी यूपी में मजबूती मिलेगी।
3. गिले-शिकवे दूर करने की कोशिश: जेल में रहते आजम ने सपा नेतृत्व पर नाराजगी जताई थी। ईद पर पत्नी तंजीन फातिमा के अकेले रोने का जिक्र कर उन्होंने कहा था, “किसी ने फोन तक नहीं किया।” यह मुलाकात उन गिले-शिकवों को दूर करने का प्रयास है। आजम ने कहा, “अखिलेश का अधिकार सिर्फ मुझ पर है।” इससे पार्टी में आंतरिक कलह कम होगा।
4. 2027 चुनाव की तैयारी: सपा 2027 में 403 सीटों पर फोकस कर रही है। आजम का प्रभाव रोहिलखंड क्षेत्र में निर्णायक है, जहां मुस्लिम वोटर 20-25% हैं। यह तस्वीर PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को मजबूत करेगी। विपक्षी BJP ने इसे “साजिश” बताया, जबकि BSP ने सपा पर “वोटबैंक पॉलिटिक्स” का आरोप लगाया।
राजनीतिक विश्लेषको का कहना है कि, “यह मुलाकात सपा के लिए ‘एक तीर से तीन शिकार’ है—एकजुटता, मुस्लिम वोट और BSP को काउंटर।” सपा समर्थक इसे “न्याय की जीत” बता रहे हैं।
