राजनीति

बाइक से कारें भारी क्यों होती हैं? राहुल गांधी का ‘वायरल’ बयान, बीजेपी ने लिया मजाक

बाइक से कारें भारी क्यों होती हैं? राहुल गांधी का ‘वायरल’ बयान, बीजेपी ने लिया मजाक

कोलंबिया विश्वविद्यालय में छात्रों के साथ बातचीत के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। वीडियो में राहुल ने बाइक और कार के वजन के फर्क को दुर्घटना सुरक्षा के नजरिए से समझाया, लेकिन उनके शब्दों को बीजेपी ने “बकवास” करार देकर चुटकी ली। बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने वीडियो शेयर करते हुए सवाल किया, “कुछ समझ आया?” यह विवाद राहुल के कोलंबिया दौरे के बीच राजनीतिक बहस को हवा दे रहा है।

वीडियो में राहुल गांधी ने छात्रों से सवाल पूछा, “एक कार आमतौर पर बाइक से भारी क्यों होती है?” फिर उन्होंने जवाब दिया, “कार का इंजन सामने लगा होता है, जो दुर्घटना में अंदर घुसकर ड्राइवर को टक्कर मार सकता है और जानलेवा साबित हो सकता है। वहीं, बाइक का इंजन अलग होता है, इसलिए वह ज्यादा सुरक्षित लगती है।” राहुल ने इसे सिस्टम डिजाइन का उदाहरण बताते हुए कहा कि “कभी-कभी सिस्टम हमें नुकसान पहुंचाने के लिए डिजाइन होते हैं।” यह बातचीत लोकतंत्र और संस्थागत सुरक्षा पर चल रही चर्चा का हिस्सा थी।

बीजेपी ने इस बयान को तुरंत निशाना बनाया। अमित मालवीय ने X (पूर्व ट्विटर) पर वीडियो पोस्ट कर लिखा, “राहुल गांधी ने बाइक और कार के वजन पर जो कारण बताए, वह समझ से परे है। कुछ समझ आया?” उन्होंने इसे “बकवास” करार दिया और राहुल के बयानों को “हास्यास्पद” बताया। बीजेपी प्रवक्ताओं ने इसे जोड़कर राहुल के पिछले विवादास्पद बयानों (जैसे आटा लीटर में नापना) से तुलना की, कहते हुए कि “राहुल जी को भौतिकी की ABC भी समझ नहीं आती।

कांग्रेस ने बचाव में कहा कि राहुल का बयान “मेटाफर” था, जो सिस्टम की कमजोरियों को दर्शाता है, न कि लिटरल। पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, “बीजेपी तथ्यों से भटकाने की कोशिश कर रही है। राहुल जी ने सुरक्षा और डिजाइन की गहराई समझाई।” हालांकि, यह वीडियो राहुल के विदेशी दौरे के दौरान भारत में राजनीतिक बहस को गर्म कर रहा है, जहां बीजेपी इसे “देश का अपमान” बता रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि राहुल का उदाहरण क्रैश टेस्टिंग और इंजन प्लेसमेंट पर आधारित था, जहां कारों में क्रम्पल जोन (इंजन एरिया) सुरक्षा के लिए डिजाइन होते हैं। लेकिन राजनीतिक संदर्भ में यह चुटकी का शिकार हो गया। क्या यह सिर्फ हंसी-मजाक है या गहरा संदेश? बहस जारी है।

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