उत्तराखंडराष्ट्रीय

नकल माफिया पर फिर शिकंजा: हाकम सिंह गिरफ्तार, उत्तराखंड पुलिस ने नाकाम की बड़ी भर्ती परीक्षा लीक योजना

नकल माफिया पर फिर शिकंजा: हाकम सिंह गिरफ्तार, उत्तराखंड पुलिस ने नाकाम की बड़ी भर्ती परीक्षा लीक योजना

देहरादून: उत्तराखंड में भर्ती घोटालों की जड़ माने जाने वाले कुख्यात नकल माफिया हाकम सिंह रावत पर एक बार फिर पुलिस का शिकंजा कस गया है। शनिवार रात को देहरादून में पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने हाकम सिंह और उसके सहयोगी पंकज गौड़ को गिरफ्तार कर लिया। दोनों पर आगामी वन दरोगा भर्ती परीक्षा का पेपर लीक कराने की बड़ी साजिश रचने का आरोप है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त नकल विरोधी कानून के तहत यह कार्रवाई की गई, जो राज्य में परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। हाकम सिंह की गिरफ्तारी से भर्ती परीक्षाओं में धांधली के नेटवर्क पर फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

पुलिस के अनुसार, हाकम सिंह (45 वर्षीय, उत्तरकाशी निवासी) को 2023 में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद भी नकल के धंधे से बाज नहीं आया। मुखबिर की सूचना पर एसटीएफ ने देहरादून के एक गुप्त ठिकाने पर छापा मारा, जहां दोनों आरोपी पेपर लीक की योजना बना रहे थे। पूछताछ में हाकम ने कबूल किया कि वह वन दरोगा परीक्षा (जिसकी तारीख 25 सितंबर है) के प्रश्न पत्र को 50 लाख रुपये में बेचने की तैयारी कर रहा था। पंकज गौड़, जो हाकम का पुराना साथी है, परीक्षा केंद्रों पर नकल मशीनरी का इंतजाम कर रहा था। पुलिस ने उनके कब्जे से 5 लाख रुपये नकद, दो मोबाइल फोन, पेपर लीक से जुड़े दस्तावेज और एक लैपटॉप बरामद किया। एसएसपी (एसटीएफ) आयुष अग्रवाल ने बताया, “यह गिरोह 10 से अधिक परीक्षाओं में सक्रिय था। हाकम मास्टरमाइंड है, जो जेल से बाहर आते ही नया नेटवर्क बुन रहा था। जांच में और सदस्यों का खुलासा होगा।”

हाकम सिंह का अपराधी इतिहास लंबा है। 2022 में यूकेएसएससी की स्नातक स्तरीय परीक्षा पेपर लीक मामले में उसे मास्टरमाइंड घोषित कर गिरफ्तार किया गया था। तब एसटीएफ ने 57 लोगों को पकड़ा, जिसमें पेपर सॉल्वर, लीक करने वाले और सॉल्यूशन देने वाले शामिल थे। हाकम पर गैंगस्टर एक्ट लगाया गया, और उसकी संपत्ति (उत्तरकाशी में गेस्ट हाउस सहित) अटैच कर दी गई। सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद वह लो प्रोफाइल में चला गया था, लेकिन सूत्रों के अनुसार, हिमाचल और पंजाब में भी उसके संपर्क थे। इस बार की योजना राज्य की वन विभाग भर्ती को निशाना बना रही थी, जिसमें 500 से अधिक पदों पर भर्ती होनी है। नकल माफिया ने परीक्षा केंद्रों के बाहर ‘सॉल्यूशन सेंटर’ स्थापित करने की तैयारी की थी, जहां अभ्यर्थियों को ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए उत्तर दिए जाते।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गिरफ्तारी की सराहना करते हुए कहा, “नकल के खिलाफ जीरो टॉलरेंस। हमारी सरकार परीक्षाओं को नकल-मुक्त बनाने के लिए कड़ी कार्रवाई करेगी।” विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे ‘देर आए दुरुस्त आए’ बताते हुए मांग की कि पूरे नेटवर्क को उजागर किया जाए। पूर्व में हाकम के गिरोह ने पटवारी, वन दरोगा और ग्रेजुएट लेवल परीक्षाओं में लाखों का काला कारोबार किया था। एसटीएफ अब हाकम के बैंक खातों और संपर्कों की जांच कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि नकल माफिया की जड़ें गहरी हैं, और डिजिटल सर्विलांस से ही इन्हें रोका जा सकता है।

यह गिरफ्तारी उत्तराखंड के युवाओं के लिए राहत भरी है, जो भर्ती घोटालों से परेशान हैं। वन दरोगा परीक्षा अब सख्त निगरानी में होगी। क्या हाकम का गिरोह पूरी तरह ध्वस्त होगा? पुलिस का दावा है कि हां, लेकिन सतर्कता बरतनी होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *