अब्बास अंसारी की विधायकी बहाल, सचिवालय ने जारी किया आदेश, मऊ में उपचुनाव रद्द
अब्बास अंसारी की विधायकी बहाल, सचिवालय ने जारी किया आदेश, मऊ में उपचुनाव रद्द
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के मऊ सदर से विधायक अब्बास अंसारी की विधायकी को उत्तर प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने औपचारिक रूप से बहाल कर दिया है। सोमवार को सचिवालय ने आदेश जारी कर अब्बास की विधायकी बहाली की पुष्टि की, जिसके बाद मऊ सदर विधानसभा सीट पर प्रस्तावित उपचुनाव रद्द हो गया है। यह फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा 20 अगस्त 2025 को अब्बास की दो साल की सजा को रद्द करने और उनकी विधायकी बहाल करने के आदेश के बाद आया है।
पृष्ठभूमि और कोर्ट का फैसला
अब्बास अंसारी, माफिया से नेता बने स्वर्गीय मुख्तार अंसारी के पुत्र, को 31 मई 2024 को मऊ की सांसद-विधायक विशेष अदालत ने 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान भड़काऊ भाषण देने के मामले में दो साल की सजा सुनाई थी। इस सजा के आधार पर उनकी विधायकी 1 जून 2025 को रद्द कर दी गई थी, और मऊ सीट को रिक्त घोषित कर उपचुनाव की तैयारी शुरू हो गई थी।
अब्बास ने इस सजा के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील की थी। 30 जुलाई 2025 को सुनवाई के बाद जस्टिस समीर जैन की बेंच ने 20 अगस्त को सजा को रद्द कर दिया और उनकी विधायकी बहाल करने का आदेश दिया। कोर्ट ने माना कि निचली अदालत का फैसला पर्याप्त सबूतों पर आधारित नहीं था।
सचिवालय का आदेश और प्रक्रिया
हाईकोर्ट के फैसले के बाद भी अब्बास की विधायकी बहाली में देरी हुई, क्योंकि विधानसभा सचिवालय ने प्रक्रियात्मक बाधाओं का हवाला दिया था। सचिवालय का कहना था कि अब्बास ने औपचारिक आवेदन नहीं दिया था, और मऊ सीट को रिक्त घोषित किया जा चुका था। हालांकि, अब्बास के वकील उपेंद्र उपाध्याय ने हाईकोर्ट के आदेश की प्रति सचिवालय को सौंपी, जिसके बाद सोमवार को विधानसभा सचिवालय ने औपचारिक आदेश जारी कर उनकी विधायकी बहाल कर दी।
सियासी हलचल
इस फैसले ने उत्तर प्रदेश की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। SBSP अध्यक्ष और योगी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने इसे “न्याय की जीत” बताया। उन्होंने कहा, “अब्बास के खिलाफ साजिश रची गई थी, लेकिन कोर्ट ने सच को सामने लाया।” दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने योगी सरकार पर विधायकी बहाली में देरी का आरोप लगाया है। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा, “यह फैसला लोकतंत्र की जीत है, लेकिन सरकार की मंशा शुरू से संदिग्ध रही है।”
भविष्य की संभावनाएं
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकती है, लेकिन अभी तक ऐसी कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। अब्बास की विधायकी बहाली से SBSP को मऊ में अपनी स्थिति मजबूत करने का मौका मिलेगा, जो आगामी विधानसभा चुनाव 2027 के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
