हरतालिका तीज 2025: 26 अगस्त को मनाया जाएगा पर्व, जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
हरतालिका तीज 2025: 26 अगस्त को मनाया जाएगा पर्व, जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
नई दिल्ली, 22 अगस्त 2025: हिंदू धर्म में हरतालिका तीज का विशेष महत्व है। यह पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस साल हरतालिका तीज को लेकर कुछ भक्तों में तारीख को लेकर असमंजस था, क्योंकि तृतीया तिथि 25 और 26 अगस्त को पड़ रही है। हालांकि, पंचांग के अनुसार, उदया तिथि के आधार पर हरतालिका तीज 26 अगस्त 2025, मंगलवार को मनाई जाएगी। यह पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य और पति की लंबी आयु के लिए विशेष माना जाता है, जबकि अविवाहित कन्याएं मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं।
हरतालिका तीज 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि 25 अगस्त 2025 को दोपहर 12:34 बजे शुरू होगी और 26 अगस्त 2025 को दोपहर 1:54 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर, हरतालिका तीज का व्रत और पूजा 26 अगस्त को होगी।
शुभ मुहूर्त:
– प्रातःकाल पूजा मुहूर्त: सुबह 5:56 बजे से 8:31 बजे तक (लगभग 2 घंटे 35 मिनट)
– प्रदोष काल पूजा: सूर्यास्त के बाद, जो 26 अगस्त को शाम 6:49 बजे से शुरू होगी।
– चार प्रहर पूजा मुहूर्त:
– पहला प्रहर: शाम 6:00 बजे से 9:00 बजे
– दूसरा प्रहर: रात 9:00 बजे से 12:00 बजे
– तीसरा प्रहर: रात 12:00 बजे से 3:00 बजे
– चौथा प्रहर: रात 3:00 बजे से सुबह 6:00 बजे
पारण समय: व्रत का पारण 27 अगस्त 2025 को सूर्योदय के बाद, सुबह 5:57 बजे से किया जाएगा।
हरतालिका तीज का महत्व
हरतालिका तीज का व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी, जिसके फलस्वरूप यह व्रत अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और मिट्टी या रेत से बनी शिव-पार्वती की प्रतिमाओं की पूजा करती हैं। इस बार व्रत के दिन साध्य योग, शुभ योग, रवि योग और महालक्ष्मी राजयोग जैसे शुभ संयोग बन रहे हैं, जो इसे और भी विशेष बनाते हैं।
पूजा विधि
1. संकल्प: सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र (लाल या हरे) पहनें और व्रत का संकल्प लें।
2. पूजा स्थल की तैयारी: एक चौकी पर स्वच्छ कपड़ा बिछाएं और मिट्टी या चांदी से बनी भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें।
3. पूजा: सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें, फिर शिव-पार्वती को जल, चंदन, अक्षत, फूल, बेलपत्र, फल और मिठाई अर्पित करें। माता पार्वती को 16 श्रृंगार की सामग्री चढ़ाएं।
4. कथा: हरतालिका तीज की कथा पढ़ें या सुनें। यह कथा माता पार्वती की तपस्या और भगवान शिव से उनके विवाह की कहानी से जुड़ी है।
5. आरती और जागरण: रात में भजन-कीर्तन करें और आरती के बाद माता पार्वती को सिंदूर चढ़ाएं। हलवे का भोग लगाकर व्रत खोलें।
6. दान: सामर्थ्य के अनुसार गरीबों या सुहागिन ब्राह्मणी को अन्न, वस्त्र या श्रृंगार सामग्री दान करें।
व्रत के नियम
– यह व्रत निर्जला होता है, इसलिए 24 घंटे तक अन्न और जल ग्रहण नहीं किया जाता।
– रात में सोना नहीं चाहिए; भजन-कीर्तन के साथ जागरण करें।
– काले वस्त्र या चूड़ियां न पहनें; लाल या रंगीन वस्त्र और चूड़ियां शुभ मानी जाती हैं।
– मासिक धर्म के दौरान व्रत न रखें, लेकिन प्रार्थना और मंत्र जाप कर सकते हैं।
हरतालिका तीज की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए हिमालय पर गंगा तट पर कठोर तप किया। उनके पिता हिमालय उन्हें भगवान विष्णु से विवाह के लिए तैयार थे, लेकिन पार्वती की सखी उन्हें जंगल में ले गईं, जहां उन्होंने भाद्रपद शुक्ल तृतीया को रेत का शिवलिंग बनाकर रातभर पूजा की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और उनकी इच्छा पूरी की।
हरतालिका तीज का यह पर्व भक्ति, प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। महिलाएं इस दिन पूरी श्रद्धा के साथ व्रत और पूजा कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य मान्यताओं और पंचांग के आधार पर दी गई है। किसी भी व्रत या पूजा से पहले विशेषज्ञ से सलाह लें।)
