वीगन डाइट का बढ़ता क्रेज और पोषण से जुड़ी नई चिंताएं
वीगन डाइट का बढ़ता क्रेज और पोषण से जुड़ी नई चिंताएं
आज के समय में वीगन जीवनशैली तेजी से ट्रेंड में है, जिसमें डेयरी उत्पादों की जगह बादाम, सोया और ओट्स जैसे प्लांट-बेस्ड विकल्पों को अपनाया जा रहा है। हालांकि, ‘द लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ’ में प्रकाशित एक नए अध्ययन ने इसे लेकर चिंता जताई है। शोधकर्ताओं का कहना है कि डेयरी उत्पादों को पूरी तरह या आंशिक रूप से प्लांट-बेस्ड विकल्पों से बदलने पर शरीर में आयोडीन, कैल्शियम, विटामिन बी12 और राइबोफ्लेविन (विटामिन बी2) जैसे जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी हो सकती है।
ब्रिटेन के बाजार में उपलब्ध 289 प्लांट-बेस्ड उत्पादों (दूध, दही और पनीर के विकल्प) पर किए गए इस विश्लेषण में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। जांचे गए उत्पादों में से केवल 12 प्रतिशत में आयोडीन, 61 प्रतिशत में कैल्शियम, 46 प्रतिशत में विटामिन बी12 और 19 प्रतिशत में ही राइबोफ्लेविन मिलाया गया था।
अध्ययन के अनुसार, यदि डेयरी उत्पादों की खपत में 20 से 35 प्रतिशत तक की जगह प्लांट-बेस्ड विकल्प ले लिए जाएं, तो किशोरियों में आयोडीन की कमी का जोखिम 54 प्रतिशत से बढ़कर 65 प्रतिशत हो सकता है। वहीं, अगर इन्हें पूरी तरह बदल दिया जाए, तो यह जोखिम 80 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। इसके अलावा, कैल्शियम और विटामिन बी2 की कमी का खतरा भी किशोरों, युवाओं और महिलाओं में काफी बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आयोडीन थायरॉयड व मस्तिष्क विकास के लिए, कैल्शियम हड्डियों के लिए और विटामिन तंत्रिका तंत्र के लिए बेहद जरूरी हैं। इसलिए, पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ पोषण का ध्यान रखना भी आवश्यक है। शोधकर्ताओं ने खाद्य उत्पादों में पोषक तत्वों को अनिवार्य रूप से मिलाने की नीति पर जोर दिया है, ताकि प्लांट-बेस्ड विकल्प पोषण के मामले में डेयरी उत्पादों का सही विकल्प बन सकें।

