नेपाल की त्रासदी के बाद उत्तराखंड अलर्ट, ग्लेशियर झीलों और नदियों की निगरानी होगी और मजबूत
नेपाल की त्रासदी के बाद उत्तराखंड अलर्ट, ग्लेशियर झीलों और नदियों की निगरानी होगी और मजबूत
देहरादून: नेपाल में हाल ही में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है। इस आपदा के बाद जहां नेपाल में राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है, वहीं उत्तराखंड सरकार भी संभावित आपदाओं को लेकर सतर्क हो गई है। आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि उत्तराखंड आपदा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील राज्य है और सरकार संभावित जोखिमों को कम करने के लिए गंभीरता से काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि नेपाल में हाल में हुई आपदा से सबक लेते हुए उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों, नदियों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है।
ग्लेशियर झीलों का होगा वैज्ञानिक सर्वेक्षण
मदन कौशिक ने बताया कि संवेदनशील ग्लेशियर झीलों के वैज्ञानिक सर्वेक्षण और नियमित मॉनीटरिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही अत्याधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
जहां जरूरत होगी, वहां अतिरिक्त उपकरण और तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि किसी भी संभावित खतरे की सूचना समय रहते प्रशासन और आम लोगों तक पहुंचाई जा सके।
जनजीवन की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता
आपदा प्रबंधन मंत्री ने कहा कि सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता लोगों के जीवन की सुरक्षा है। उन्होंने कहा कि आपदा से पहले की तैयारी, समय पर चेतावनी, स्थानीय स्तर पर क्षमता निर्माण और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय के जरिए संभावित जनहानि को कम करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
मानसून के दौरान सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने तथा किसी भी स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
नेपाल की आपदा के बाद जिलों में समीक्षा बैठकें
26 अगस्त 2026 को नेपाल में आई भीषण आपदा के बाद उत्तराखंड सरकार ने भी अपनी तैयारियों की समीक्षा शुरू कर दी है। प्रदेश में ग्लेशियर झीलों से जुड़े संभावित खतरों को देखते हुए अर्ली वार्निंग सिस्टम को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।
नेपाल की त्रासदी के बाद आपदा प्रबंधन विभाग ने प्रदेश के सभी जिलों के जिलाधिकारियों के साथ बैठकें कीं और संवेदनशील क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा की।
नदियों के जलस्तर और संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर
समीक्षा बैठकों में ग्लेशियर झीलों के साथ-साथ नदियों के जलस्तर, संवेदनशील स्थलों, अर्ली वार्निंग सिस्टम, संचार व्यवस्था और आपदा के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया की तैयारियों का जायजा लिया गया।
सभी जिलाधिकारियों को संभावित संवेदनशील क्षेत्रों की नियमित निगरानी करने और किसी भी असामान्य गतिविधि या खतरे की सूचना तत्काल उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार का कहना है कि समय रहते खतरे की पहचान और प्रभावी चेतावनी व्यवस्था के जरिए आपदा के दौरान होने वाली जनहानि को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
