राजनीति

परिसीमन विधेयक के लिए विशेष सत्र बुला सकती है मोदी सरकार, दो-तिहाई बहुमत जुटाने में जुटी

परिसीमन विधेयक के लिए विशेष सत्र बुला सकती है मोदी सरकार, दो-तिहाई बहुमत जुटाने में जुटी

नई दिल्ली: मॉनसून सत्र में परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पेश नहीं कर पाने के बाद केंद्र की मोदी सरकार अब इसके लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रही है। हालांकि, सरकार विशेष सत्र का फैसला तभी करेगी, जब वह विधेयकों को पारित कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हो जाए।

सूत्रों के मुताबिक, सरकार संख्या बल जुटाने के लिए विपक्ष के कुछ दलों से लगातार बातचीत कर रही है। माना जा रहा है कि संख्या पूरी होने पर दो दिन का विशेष सत्र बुलाया जा सकता है।

अभी नहीं हुआ संसद का सत्रावसान

13 अगस्त को मॉनसून सत्र समाप्त होने के बाद लोकसभा और राज्यसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था। हालांकि, दोनों सदनों का अभी तक औपचारिक सत्रावसान नहीं हुआ है। ऐसे में जरूरत पड़ने पर पीठासीन अधिकारी सदन की बैठक दोबारा बुला सकते हैं।

सरकार ने कथित तौर पर मॉनसून सत्र के दौरान ही कुछ सांसदों को संकेत दिया था कि दोनों सदनों को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया जाएगा, लेकिन सत्रावसान नहीं किया जाएगा। इसके पीछे विशेष सत्र की संभावना को भी एक वजह माना जा रहा है।

अप्रैल में भी हुई थी ऐसी कोशिश

सरकार ने बजट सत्र के दौरान भी इसी तरह का विकल्प अपनाया था। उस समय सत्रावसान करने के बजाय 16 से 18 अप्रैल तक तीन दिनों का विशेष सत्र बुलाया गया था। हालांकि, पूरी कोशिश के बावजूद सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों को पारित नहीं करा सकी थी।

अब सरकार के लिए परिस्थितियां कुछ बदली हुई बताई जा रही हैं। अप्रैल के बाद कई सांसदों के राजनीतिक पाले बदलने से एनडीए के संख्या बल में बढ़ोतरी हुई है।

सरकार को अभी भी कुछ विपक्षी दलों की जरूरत

सूत्रों के अनुसार, अप्रैल से अब तक एनडीए में 36 से ज्यादा सांसदों के जुड़ने का दावा किया जा रहा है। इसके बावजूद संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए सरकार को कुछ विपक्षी दलों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है।

बताया जा रहा है कि डीएमके और एनसीपी (शरद पवार गुट) जैसे दलों का समर्थन महत्वपूर्ण हो सकता है। इसके अलावा कुछ विपक्षी सांसदों की गैरहाजिरी भी सरकार के लिए संख्या पूरी करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। सूत्रों के मुताबिक सरकार अभी संख्या बल को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है।

समर्थन के बदले मंत्रिमंडल में जगह की चर्चा?

राजनीतिक हलकों में संभावित विशेष सत्र के साथ मोदी मंत्रिपरिषद में फेरबदल की अटकलें भी जुड़ गई हैं। माना जा रहा है कि नए राजनीतिक सहयोगियों से समर्थन जुटाने के दौरान मंत्रिपरिषद में प्रतिनिधित्व को लेकर भी बातचीत हो सकती है।

टीएमसी से अलग हुए नेताओं, शिवसेना (यूबीटी) से आए सांसदों और आम आदमी पार्टी से भाजपा में शामिल हुए सांसदों को मंत्रिमंडल में जगह मिलने की संभावनाओं की भी चर्चा है।

‘एक देश, एक चुनाव’ समेत कई विधेयक लंबित

मॉनसून सत्र के दौरान सरकार ने कई महत्वपूर्ण और विवादास्पद विधेयकों को आगे नहीं बढ़ाया। इनमें ‘एक देश, एक चुनाव’, जेल जाने की स्थिति में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों की सदस्यता से जुड़े प्रावधान वाला विधेयक और विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक शामिल हैं।

इन विधेयकों से जुड़ी संयुक्त संसदीय समितियों (JPC) का कार्यकाल शीतकालीन सत्र तक बढ़ाया गया है। वहीं एफसीआरए से जुड़े विधेयक को भी जेपीसी के पास भेज दिया गया है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर सरकार दो-तिहाई संख्या जुटाकर परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने में सफल रहती है, तो आगामी विधानसभा चुनावों से पहले यह भाजपा के लिए बड़ा राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक लाभ हो सकता है।

हालांकि, सरकार फिलहाल संख्या बल को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है। ऐसे में विशेष सत्र बुलाने का फैसला समर्थन जुटने के बाद ही होने की संभावना है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *