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दिल्ली रेस क्लब पर चला बुलडोजर, 53 एकड़ परिसर पर केंद्र ने लिया कब्जा

दिल्ली रेस क्लब पर चला बुलडोजर, 53 एकड़ परिसर पर केंद्र ने लिया कब्जा

नई दिल्ली: दिल्ली रेस क्लब परिसर में बुलडोजर कार्रवाई शुरू हो गई है। केंद्र सरकार द्वारा लुटियंस दिल्ली स्थित क्लब के 53 एकड़ परिसर का कब्जा लेने के कुछ ही घंटे बाद यह कार्रवाई की गई। इससे क्लब से जुड़े लोगों में नाराजगी और चिंता का माहौल है।

कोर्ट ने खारिज की क्लब की याचिका

मंगलवार को पटियाला हाउस कोर्ट ने दिल्ली रेस क्लब की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें संपदा अधिकारी द्वारा सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम के तहत 11 अगस्त को जारी बेदखली आदेश पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की गई थी।

कोर्ट के फैसले के बाद केंद्र सरकार ने लोक कल्याण मार्ग स्थित परिसर का कब्जा अपने हाथ में ले लिया।

ऐतिहासिक इमारतों पर चला बुलडोजर

क्लब के एक अधिकारी के मुताबिक, बुलडोजर ने रेस क्लब की कई ऐतिहासिक संरचनाओं को ढहा दिया। इनमें अस्तबल, बुकमेकर्स रिंग, विनिंग पोस्ट, फोटो-फिनिश कैमरा, सैडलिंग एनक्लोजर समेत घुड़दौड़ से जुड़ी कई अन्य सुविधाएं शामिल हैं।

क्लब से जुड़े एक सूत्र ने कहा कि रेसिंग से जुड़े लोगों के लिए यह बेहद परेशान करने वाला दृश्य है।

क्लब में अभी भी करीब 50 घोड़े

अधिकारी के अनुसार, क्लब में पहले 250 से ज्यादा घोड़े थे। इनमें से करीब 200 घोड़ों को उनके मालिक वापस ले जा चुके हैं, जबकि लगभग 50 घोड़े अभी भी परिसर में मौजूद हैं।

अधिकारी ने बताया कि क्लब को सभी व्यवस्थाएं खाली करने के लिए 14 सितंबर तक का समय दिया गया है। बाकी घोड़ों को भी अगले एक-दो सप्ताह में उनके मालिकों के पास भेजने की योजना है।

गर्मी से बचाने के लिए खास तरीके से बनाए गए थे अस्तबल

क्लब के अस्तबलों को 1940 के दशक में दोबारा विकसित किया गया था। इन्हें दिल्ली की भीषण गर्मी को ध्यान में रखते हुए इस तरह डिजाइन किया गया था कि घोड़ों को पर्याप्त हवा और पानी मिल सके।

क्लब के अधिकारियों के मुताबिक, यहां रखे जाने वाले थोरब्रेड घोड़ों की कीमत उनकी नस्ल और रेसिंग रिकॉर्ड के आधार पर करीब 3 लाख से 50 लाख रुपये तक होती है।

रेसिंग सेंटरों में बने नए परिसरों में इन घोड़ों को पहुंचाने के लिए हॉर्स फ्लोट का इस्तेमाल किया जा रहा है।

मार्च में शुरू हुआ था कानूनी विवाद

दिल्ली रेस क्लब का कानूनी विवाद इसी साल मार्च में शुरू हुआ था। उस समय भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) ने क्लब को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर सरकारी जमीन खाली करने को कहा था। नोटिस में जमीन को सार्वजनिक कार्यों के लिए आवश्यक बताया गया था।

क्लब ने इस आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। इसके बाद 26 मई को हाई कोर्ट की एक बेंच ने उस अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया, जिसके जरिए क्लब के खिलाफ कारण बताओ कार्यवाही पर रोक लगी हुई थी। इसके साथ ही बेदखली की प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया था।

अब कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद केंद्र सरकार ने परिसर का कब्जा ले लिया है और रेस क्लब की ऐतिहासिक संरचनाओं को हटाने की कार्रवाई शुरू हो गई है।

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