राजनीति

परिसीमन बिल पर सरकार-विपक्ष में तकरार जारी, खरगे ने PM मोदी को लिखी चिट्ठी; सर्वदलीय बैठक की मांग

परिसीमन बिल पर सरकार-विपक्ष में तकरार जारी, खरगे ने PM मोदी को लिखी चिट्ठी; सर्वदलीय बैठक की मांग

नई दिल्ली: परिसीमन बिल को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच सियासी टकराव लगातार जारी है। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मॉनसून सत्र का अब तक सत्रावसान नहीं किए जाने पर सवाल उठाए हैं। खरगे ने कहा कि 13 अगस्त को मॉनसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बावजूद सत्रावसान नहीं किया गया है, जिससे कई तरह की आशंकाएं पैदा हो रही हैं।

खरगे ने PM मोदी को लिखी चिट्ठी

खरगे ने अपने पत्र में कहा कि उन्होंने इससे पहले 16 जुलाई को भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर परिसीमन के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी। उनका कहना है कि सभी राजनीतिक दलों को सरकार के प्रस्ताव की जानकारी मिलनी चाहिए और उस पर विचार करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।

खरगे ने संसदीय कार्य मंत्री के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें संसद का विशेष सत्र बुलाने की संभावना की बात कही गई थी। उन्होंने आशंका जताई कि शायद इसी वजह से मॉनसून सत्र का औपचारिक सत्रावसान नहीं किया गया है।

परिसीमन पर कांग्रेस की तीन बड़ी मांगें

कांग्रेस अध्यक्ष ने परिसीमन को लेकर तीन प्रमुख मांगें रखी हैं—

लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को अगले 25 वर्षों तक फ्रीज रखा जाए।

राज्यों को आवंटित लोकसभा सीटों की संख्या में भी अगले 25 वर्षों तक बदलाव न किया जाए।

मौजूदा स्वरूप में महिला आरक्षण को 2029 से लागू किया जाए।

खरगे ने एक बार फिर प्रधानमंत्री से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग करते हुए कहा कि परिसीमन देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा है और सरकार को अप्रैल की तरह इसे जल्दबाजी में पारित कराने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

डीएमके के रुख पर टिकी नजर

परिसीमन को लेकर कांग्रेस के रुख से कई विपक्षी दल भी सहमत नजर आ रहे हैं। तमिलनाडु विधानसभा परिसीमन के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर चुकी है। ऐसे में डीएमके की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

विपक्षी खेमे की कोशिश है कि डीएमके परिसीमन के मुद्दे पर सरकार का समर्थन न करे। दक्षिण भारत के राज्यों के बीच भी इस मुद्दे पर चर्चा होती रही है।

सरकार ‘वेट एंड वॉच’ के मूड में

मौजूदा हालात को देखते हुए सरकार परिसीमन विधेयक को लेकर ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति पर आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। सरकार संख्या बल को लेकर पूरी तरह आश्वस्त होने के बाद ही विशेष सत्र बुलाने और संविधान संशोधन विधेयक को आगे बढ़ाने का फैसला करना चाहती है।

पिछली कोशिश में सरकार को इसी मुद्दे पर लोकसभा में चुनौती का सामना करना पड़ा था। ऐसे में इस बार सरकार किसी भी तरह का जोखिम लेने से बचना चाहती है।

विपक्ष की रणनीति भी साफ

विपक्ष की कोशिश है कि परिसीमन के मुद्दे पर डीएमके को अपने साथ रखा जाए, भले ही वह INDIA गठबंधन का हिस्सा न हो। कांग्रेस इसी मुद्दे पर लगातार सरकार पर दबाव बनाने के साथ विपक्षी दलों को एकजुट करने की कोशिश कर रही है।

ऐसे में आने वाले दिनों में परिसीमन बिल और संभावित विशेष सत्र को लेकर सियासी गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।

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