Friday, July 10, 2026
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बच्चों ने नहीं की देखभाल तो वापस मिल जाएगी संपत्ति, बॉम्बे हाई कोर्ट का बुजुर्ग माता-पिता के पक्ष में बड़ा फैसला

बच्चों ने नहीं की देखभाल तो वापस मिल जाएगी संपत्ति, बॉम्बे हाई कोर्ट का बुजुर्ग माता-पिता के पक्ष में बड़ा फैसला

​मुंबई: बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुजुर्ग माता-पिता के अधिकारों की रक्षा करते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि माता-पिता अपने बच्चों को इस शर्त पर संपत्ति देते हैं कि वे बुढ़ापे में उनकी देखभाल करेंगे, तो शर्त पूरी न होने पर वे उस संपत्ति को वापस हासिल कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि यह अधिकार माता-पिता के आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने पर भी पूरी तरह लागू होता है।

​कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखाड़ की खंडपीठ ने लोअर परेल के एक जौहरी (पिता) के पक्ष में फैसला सुनाया। पिता ने साल 2023 में एक गिफ्ट डीड के जरिए अपना फ्लैट इस शर्त पर बेटे को दिया था कि वह उनकी और उनकी पत्नी की देखभाल करेगा। हालांकि, साल 2025 में परेशान होकर बुजुर्ग दंपति को घर छोड़ना पड़ा। इसके बाद वरिष्ठ नागरिक न्यायाधिकरण (ट्रिब्यूनल) ने बेटे को 60 दिनों में फ्लैट खाली करने का आदेश दिया था, जिसे हाई कोर्ट ने भी सही ठहराया है और बेटे की याचिका खारिज कर दी है।

​बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच का फैसला: 16 वर्षीय नाबालिग रेप पीड़िता को 27 सप्ताह का गर्भपात कराने की अनुमति

​नागपुर: बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने एक अन्य संवेदनशील मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए 27 सप्ताह की गर्भवती 16 वर्षीय बलात्कार पीड़िता को चिकित्सकीय गर्भ समापन (गर्भपात) कराने की अनुमति दे दी है। पीड़िता की कम उम्र और गर्भावस्था की लंबी अवधि (27 सप्ताह) को देखते हुए कानूनन इसके लिए अदालत की मंजूरी आवश्यक थी।

​अदालत ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट को आधार बनाते हुए यह निर्णय लिया। कोर्ट ने माना कि इस उम्र में गर्भावस्था को जारी रखने से पीड़िता के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर बेहद गंभीर और विपरीत प्रभाव पड़ सकते हैं। इसके साथ ही न्यायालय ने संबंधित अस्पताल को निर्देश दिया है कि गर्भपात की इस पूरी प्रक्रिया के दौरान नाबालिग पीड़िता की सुरक्षा, स्वास्थ्य और गोपनीयता (Privacy) का पूरा ध्यान रखा जाए।

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