कर्नाटक-महाराष्ट्र सीमा विवाद: “महाजन आयोग की रिपोर्ट ही अंतिम”, महाराष्ट्र की बैठक के बाद सीएम डीके शिवकुमार का बड़ा बयान
कर्नाटक-महाराष्ट्र सीमा विवाद: “महाजन आयोग की रिपोर्ट ही अंतिम”, महाराष्ट्र की बैठक के बाद सीएम डीके शिवकुमार का बड़ा बयान
बेंगलुरु: कर्नाटक और महाराष्ट्र के बीच दशकों पुराना सीमा विवाद एक बार फिर गरमा गया है। महाराष्ट्र सरकार द्वारा इस मुद्दे पर हाई पावर कमेटी की बैठक आयोजित किए जाने के बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार कर्नाटक के भौगोलिक और भाषाई हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि सीमा विवाद पर महाजन आयोग की रिपोर्ट ही अंतिम (Final) है और कर्नाटक सरकार इसी को आधार मानकर अपना पक्ष मजबूती से रखेगी।
वरिष्ठ नेताओं और कानूनी विशेषज्ञों से मंथन
महाराष्ट्र सरकार की उच्च स्तरीय बैठक के तुरंत बाद एक्शन में आई कर्नाटक सरकार ने कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं की समीक्षा शुरू कर दी है:
नेताओं से चर्चा: सीएम डीके शिवकुमार ने बताया कि उन्होंने इस संवेदनशील मुद्दे पर पूर्व कानून मंत्री एच.के. पाटिल और वरिष्ठ मंत्री एम.बी. पाटिल के साथ विस्तृत चर्चा की है।
दस्तावेजों का अध्ययन: सरकार सीमा विवाद से जुड़े पुराने कानूनी दस्तावेजों और रिपोर्टों का दोबारा गहन अध्ययन कर रही है ताकि अदालत में राज्य के पक्ष को और ज्यादा मजबूत किया जा सके।
कन्नड़ संगठनों को बेंगलुरु बुलाया जाएगा
सीमाई क्षेत्रों में कन्नड़ भाषा और संस्कृति के संरक्षण को लेकर कन्नड़ समर्थक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात की। सीएम ने आश्वासन दिया कि इन संगठनों की चिंताओं और सुझावों को सरकार बेहद गंभीरता से ले रही है। इसके लिए जल्द ही कन्नड़ संगठनों के प्रतिनिधियों को बेंगलुरु आमंत्रित किया जाएगा, जहां उनके साथ एक विस्तृत रणनीति बैठक की जाएगी।
अदालती मामलों की होगी कानूनी समीक्षा
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि सीमा विवाद से जुड़े जो भी मामले फिलहाल अदालतों में लंबित (Pending) हैं, सरकार उनकी मौजूदा कानूनी स्थिति की पूरी जानकारी जुटा रही है। भविष्य की पूरी रणनीति तथ्यों और कानून के दायरे में रहकर तय की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कर्नाटक के हितों के साथ किसी भी स्तर पर कोई समझौता न हो।
गौरतलब है कि कर्नाटक और महाराष्ट्र के बीच का यह सीमा विवाद बेहद संवेदनशील और पुराना राजनीतिक मुद्दा है। महाराष्ट्र सरकार की हालिया सक्रियता और उसके जवाब में कर्नाटक के मुख्यमंत्री के इस कड़े बयान ने दोनों राज्यों के बीच सियासी तपिश को एक बार फिर बढ़ा दिया है।
