योगिनी एकादशी पर दुर्लभ संयोग: व्रत, महत्व और पूजा विधि
योगिनी एकादशी पर दुर्लभ संयोग: व्रत, महत्व और पूजा विधि
इस वर्ष आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी पर त्रिपुष्कर योग और भरणी नक्षत्र का अत्यंत शुभ व दुर्लभ संयोग बन रहा है। भगवान विष्णु को समर्पित इस एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है।
तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 10 जुलाई की सुबह 8:16 बजे से शुरू होकर 11 जुलाई की सुबह 5:00 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार गृहस्थ लोग 10 जुलाई को और वैष्णव संप्रदाय के लोग 11 जुलाई को व्रत रखेंगे।
धार्मिक महत्व
मान्यता है कि योगिनी एकादशी का व्रत करने से मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य मिलता है। इसके प्रभाव से जीवन के कष्ट, दुख और दरिद्रता दूर होती है तथा पापों से मुक्ति मिलती है। पौराणिक कथा के अनुसार, राजा कुबेर के सेवक हेममाली ने देवर्षि नारद के मार्गदर्शन में यह व्रत करके अपने गंभीर रोग से मुक्ति पाई थी।
पूजा विधि और नियम
प्रातः स्नान के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा करें।
शंख से भगवान का अभिषेक करें और पूजा में तुलसी की मंजरी अवश्य अर्पित करें।
पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक प्रज्ज्वलित कर प्रार्थना करें।
इस दिन भगवान विष्णु को चावल अर्पित नहीं किए जाते और व्रतधारी भी चावल का सेवन नहीं करते।
