राजनीति

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के स्टाफ पर बड़ी गाज, 4 निजी सचिव एक साथ हटाए गए; कांग्रेस ने उठाए सवाल

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के स्टाफ पर बड़ी गाज, 4 निजी सचिव एक साथ हटाए गए; कांग्रेस ने उठाए सवाल

​नई दिल्ली: केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिला है। पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के स्टाफ में तैनात चार निजी सचिवों को एक साथ उनके पदों से हटा दिया गया है। अचानक लिए गए इस बड़े फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर कई तरह की अटकलें लगनी शुरू हो गई हैं।

​किन 4 अधिकारियों पर गिरी गाज?

​पीटीआई (PTI) के मुताबिक, 3 जुलाई को जारी चार अलग-अलग आदेशों के माध्यम से इन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से हटाने का फैसला सुनाया गया। इन अधिकारियों के नाम और उन पर हुई कार्रवाई इस प्रकार है:

​अमर सिंह (मुख्य निजी सचिव): इन्हें इनके पद से हटाकर वापस इनके मूल कैडर में भेज दिया गया है। जानकारी के अनुसार, इन्हें प्रशासनिक आधार पर हटाया गया है।

​शैलेश कुमार सिंह (अतिरिक्त मुख्य सचिव): इन्हें समय से पहले ‘एक्सटेंडेड कूलिंग ऑफ’ के साथ उनके मूल विभाग में वापस भेज दिया गया है।

​आयुष सारण (अतिरिक्त निजी सचिव): इनकी सेवाएं तुरंत प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं।

​सिद्धार्थ यादव (सहायक निजी सचिव): इनकी नियुक्ति भी तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी गई है।

​हालांकि, सरकार द्वारा जारी आधिकारिक आदेशों में इन अधिकारियों को एक साथ हटाए जाने के मुख्य कारणों का कोई स्पष्ट जिक्र नहीं किया गया है। सूत्रों का मानना है कि इस सख्त फैसले के जरिए मंत्रालय के बाकी स्टाफ को भी सचेत रहने का संदेश दिया गया है।

​कांग्रेस ने घेरा, जयराम रमेश ने उठाए गंभीर सवाल

​इस मामले के सामने आते ही विपक्ष ने सरकार पर हमले तेज कर दिए हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

​जयराम रमेश ने लिखा, “यह किसी से छिपा नहीं है कि मोदी सरकार में इस तरह की नियुक्तियां कैसे की जाती हैं। क्या बिना आग के इतना धुआं उठ सकता है?”

​उन्होंने अपने एक अन्य पोस्ट में मंत्रालय के काम पर निशाना साधते हुए आगे लिखा, “भूपेंद्र यादव के मंत्रालय में शासन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। यह मंत्रालय पर्यावरण और वनों की रक्षा करने तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के मामले में लगभग पूरी तरह विफल रहा है।”

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