इतिहास के सबसे बड़े कानूनी संकट में मेटा: 4 अमेरिकी राज्यों ने लगाया बच्चों को सोशल मीडिया की लत लगाने का आरोप, ट्रिलियन डॉलर के जुर्माने का खतरा
इतिहास के सबसे बड़े कानूनी संकट में मेटा: 4 अमेरिकी राज्यों ने लगाया बच्चों को सोशल मीडिया की लत लगाने का आरोप, ट्रिलियन डॉलर के जुर्माने का खतरा
नई दिल्ली: टेक जगत की दिग्गज कंपनी और फेसबुक-इंस्टाग्राम की पेरेंट कंपनी ‘मेटा’ (Meta) इस वक्त इतिहास के सबसे बड़े कानूनी संकट में फंसती नजर आ रही है. अमेरिका के चार बड़े राज्यों ने मेटा पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि कंपनी ने जानबूझकर अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को इस तरह डिजाइन किया जिससे बच्चों और युवाओं को इसकी लत (एडिक्शन) लग जाए, जो सीधे तौर पर उनकी मेंटल हेल्थ (मानसिक स्वास्थ्य) के साथ खिलवाड़ है.
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह ऐतिहासिक मामला इसी साल अगस्त 2026 में कैलिफोर्निया की अदालत में ट्रायल (सुनवाई) के लिए जाएगा. इस मामले में कैलिफोर्निया, कोलोराडो, केंटकी और न्यू जर्सी जैसे राज्य मेटा के खिलाफ अदालत में अपना पक्ष रखेंगे.
कैसे तय हुई जुर्माने की यह ऐतिहासिक रकम?
मेटा द्वारा अदालत में दी गई जानकारी के अनुसार, इन चार राज्यों ने उनके प्लेटफॉर्म्स से प्रभावित हुए बच्चों और युवाओं की कुल संख्या के आधार पर ‘यूजर्स प्रोटेक्शन एक्ट’ के तहत इस भारी-भरकम जुर्माने का आकलन किया है. हालांकि, जुर्माने की सटीक गणना अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन यह मांग मेटा की कुल मार्केट वैल्यू (लगभग 1.4 ट्रिलियन डॉलर) के आसपास पहुंच रही है.
मेटा की सफाई:
दूसरी तरफ, मेटा ने इन सभी आरोपों और दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. कंपनी का कहना है कि इस मांग का कोई कानूनी या तथ्यात्मक आधार नहीं है और यूजर्स प्रोटेक्शन के इतिहास में इतने बड़े जुर्माने का कोई दूसरा उदाहरण नहीं मिलता. मेटा ने अपने प्लेटफॉर्म्स को एडिक्टिव बताने वाले आरोपों पर तर्क दिया कि सोशल मीडिया एडिक्शन को अभी तक किसी भी आधिकारिक चिकित्सा संस्थान द्वारा मानसिक बीमारी नहीं माना गया है.
सोशल मीडिया के बाद अब AI भी घेरे में
डिजिटल एडिक्शन और मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने की यह कानूनी लड़ाई अब सिर्फ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक सीमित नहीं रही है. टेक्नोलॉजी की दुनिया में अब यही चिंताएं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) प्रोडक्ट्स और चैटबॉट्स की तरफ भी बढ़ने लगी हैं. इसका मुख्य कारण यह है कि आधुनिक AI चैटबॉट्स अब इंसानों की तरह बातचीत करने और उनसे भावनात्मक रूप से जुड़ने में सक्षम हो चुके हैं.
OpenAI और सैम ऑल्टमैन पर केस: पिछले महीने ही फ्लोरिडा के अटॉर्नी जनरल जेम्स उथमेयर ने दिग्गज एआई कंपनी OpenAI और उसके सीईओ सैम ऑल्टमैन के खिलाफ एक मुकदमा दर्ज कराया है. आरोप है कि कंपनी ने ChatGPT को तेजी से बाजार में फैलाने के चक्कर में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की. साथ ही युवाओं में इसकी बढ़ती निर्भरता और इसके द्वारा दी जाने वाली गलत सलाहों के खतरों को ठीक से हैंडल नहीं किया. हालांकि, OpenAI ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि वे अपने सुरक्षा उपायों में लगातार सुधार कर रहे हैं.
चैटबॉट्स के प्रति बढ़ रहा है इंसानों का भावनात्मक लगाव
हाल ही में कई ऐसी चौंकाने वाली रिपोर्ट्स और रिसर्च सामने आई हैं, जो यह दर्शाती हैं कि लोग AI चैटबॉट्स के साथ गहरे और भावनात्मक रिश्तों में बंधते जा रहे हैं:
ChatGPT से हुआ प्यार: हाल ही में 66 साल की एक महिला का मामला सामने आया, जो शुरुआत में बागवानी (Gardening) और टैक्स से जुड़े कामों में मदद के लिए ChatGPT का इस्तेमाल कर रही थी, लेकिन धीरे-धीरे लगातार बातचीत के कारण वह उससे प्यार कर बैठी.
अकेलेपन का सहारा: कई अन्य मामलों में यह देखा गया है कि जो लोग अकेलेपन, अवसाद या किसी लंबी बीमारी से जूझ रहे हैं, वे इंसानों के बजाय AI को अपना सबसे बड़ा मददगार और हमदर्द मान रहे हैं.
यही वजह है कि रेगुलेटर्स और कानूनी एजेंसियां अब टेक कंपनियों को लेकर बेहद सख्त रुख अपना रही हैं, ताकि युवाओं और समाज को डिजिटल एडिक्शन के खतरों से बचाया जा सके.
