राजनीति

E-20 पेट्रोल पर केजरीवाल के सवाल और हरदीप सिंह पुरी का जवाब, जानें पूरा विवाद

E-20 पेट्रोल पर केजरीवाल के सवाल और हरदीप सिंह पुरी का जवाब, जानें पूरा विवाद

​नई दिल्ली: देश में E-20 पेट्रोल (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित ईंधन) के इस्तेमाल को लेकर एक नया सियासी और तकनीकी विवाद खड़ा हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने ऑटोमोबाइल कंपनियों से पुराने वाहनों की सुरक्षा और माइलेज को लेकर सीधे सवाल पूछे हैं। वहीं, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इन चिंताओं को खारिज करते हुए इसे भ्रम फैलाने की कोशिश करार दिया है।

​अरविंद केजरीवाल ने 29 ऑटोमोबाइल कंपनियों को लिखा पत्र

​नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बताया कि उन्होंने देश की 29 वाहन निर्माता कंपनियों को पत्र भेजा है। इनमें मारुति, टोयोटा और हीरो जैसी बड़ी कंपनियों को अलग से भी पत्र लिखा गया है। केजरीवाल ने कंपनियों के सार्वजनिक बयानों और उनकी गाड़ियों की गाइडबुक (ओनर मैनुअल) के बीच विरोधाभास का मुद्दा उठाया है।

​केजरीवाल का कहना है कि इन प्रमुख कंपनियों ने पहले सरकार की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि E-20 पेट्रोल से पुराने वाहनों को कोई समस्या नहीं होगी। लेकिन, इन्हीं कंपनियों की ओर से जारी ओनर मैनुअल में साफ लिखा गया है कि पुराने वाहनों में E-10 (10 प्रतिशत एथेनॉल) से ज्यादा मिश्रण वाला पेट्रोल इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

​केजरीवाल ने कंपनियों से पूछे दो सीधे सवाल:

​पहला सवाल: क्या कंपनियां यह स्पष्ट करेंगी कि साल 2023 से पहले बने उनके सभी वाहनों में E-20 पेट्रोल का इस्तेमाल पूरी तरह सुरक्षित है?

​दूसरा सवाल: यदि E-20 पेट्रोल के इस्तेमाल से किसी गाड़ी की माइलेज में 5 प्रतिशत से अधिक की कमी आती है या उसके किसी पुर्जे को नुकसान पहुंचता है, तो क्या कंपनियां ग्राहकों को इसका मुआवजा (भरपाई) देंगी?

​पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी की प्रतिक्रिया: ‘फैलाया जा रहा है भ्रम’

​इस विवाद पर केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि E-20 पेट्रोल को लेकर लोगों के बीच बेवजह का भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ईंधन से होने वाली समस्याओं की खबरें वास्तविकता से परे हैं और इन्हें गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।

​हरदीप सिंह पुरी ने दलील दी कि खुद वाहन निर्माता कंपनियां और ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट्स लगातार कह रहे हैं कि E-20 पेट्रोल से गाड़ियों को कोई परेशानी नहीं है। जब उद्योग जगत और सभी तकनीकी पक्ष इसे पूरी तरह स्वीकार कर चुके हैं, तो अचानक इस मुद्दे पर चिंता जताना समझ से परे है।

​क्या है सरकार का एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य?

​भारत सरकार एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम के तहत पूरे देश में चरणबद्ध तरीके से 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (E-20) लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। सरकार के अनुसार, इस नीति के मुख्य फायदे निम्नलिखित हैं:

​कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के आयात पर भारत की निर्भरता कम होगी।

​देश की मूल्यवान विदेशी मुद्रा की भारी बचत होगी।

​पर्यावरण में प्रदूषण का स्तर कम होगा।

​गन्ने और अनाज से एथेनॉल उत्पादन बढ़ने के कारण किसानों को अतिरिक्त आय मिलेगी।

​सरकार का साफ कहना है कि यह पूरी योजना सभी तकनीकी आंकड़ों, वैज्ञानिक शोध और ऑटोमोबाइल उद्योग से मिले गहन सुझावों के आधार पर ही आगे बढ़ाई जा रही है।

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