महाशक्तियों में आर-पार: ट्रंप ने दी ईरान के बुनियादी ढांचे को तबाह करने और ‘खार्ग द्वीप’ पर कब्ज़े की धमकी, ईरान बोला- ‘ट्रिगर पर है उंगली’
महाशक्तियों में आर-पार: ट्रंप ने दी ईरान के बुनियादी ढांचे को तबाह करने और ‘खार्ग द्वीप’ पर कब्ज़े की धमकी, ईरान बोला- ‘ट्रिगर पर है उंगली’
अंकारा/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष-विराम (Ceasefire) पूरी तरह टूटने की कगार पर पहुंच गया है। तुर्की की राजधानी अंकारा में आयोजित नाटो (NATO) समिट के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बेहद सख्त लहजे में चेतावनी दी है। समाचार एजेंसी ‘AP’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर ज़रूरत पड़ी तो अमेरिका ईरान के आम नागरिकों से जुड़े बुनियादी ढांचे को तबाह कर सकता है और उसके रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘खार्ग द्वीप’ पर कब्ज़ा कर सकता है।
नाटो समिट के दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की से मुलाकात करने से ठीक पहले ट्रंप ने पत्रकारों से खुलकर कहा, “मैं थोड़ी चेतावनी दे दूं, हम आज रात उन पर और ज़ोरदार हमला करने वाले हैं।”
ट्रंप की दोटूक: “बिजली और पानी के प्लांट भी कर देंगे नष्ट”
राष्ट्रपति ट्रंप ने अंकारा में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दावा किया कि पिछले दिनों ईरान पर हुए अमेरिकी हमलों का बहुत बड़ा असर हुआ है और तेहरान के उन रडार सिस्टम को नष्ट कर दिया गया है जिन्हें वे फिर से बना रहे थे। अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी की सीमा बढ़ाते हुए कहा:
”अगर ज़रूरत पड़ी, तो हम उनकी बिजली बनाने वाली सुविधाएं और बिजली संयंत्र (Power Plants) नष्ट कर देंगे। यही नहीं, उनके डीसेलिनेशन प्लांट (समुद्र के खारे पानी को मीठा बनाने वाले प्लांट) को भी हम नष्ट कर देंगे, हालांकि मुझे व्यक्तिगत रूप से ऐसा करना बिल्कुल पसंद नहीं है।”
’खार्ग द्वीप’ पर कब्ज़े की रणनीति और होर्मुज़ जलडमरू पर नजर
ट्रंप ने अपनी धमकी में ईरान के तट के पास स्थित खार्ग द्वीप (Kharg Island) का विशेष रूप से जिक्र किया, जो ईरान के तेल निर्यात का मुख्य केंद्र माना जाता है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस द्वीप पर कब्ज़ा कर सकता है और ईरान कुछ नहीं कर पाएगा।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव पर बात करते हुए उन्होंने कहा, “ईरान चाहे तो वहां कुछ माइन्स (बारूदी सुरंगें) बिछा सकता है… लेकिन यह उनके लिए मुश्किल होगा, क्योंकि हम उनकी छोटी नावों को उसी हथियार से नष्ट कर रहे हैं जिससे ड्रग माफियाओं को खत्म करते हैं।” उन्होंने यह भी दावा किया कि नाटो में अमेरिका के सहयोगी देश भी इस क्षेत्र में अपने ‘माइन्सवीपर’ (सुरंगें हटाने वाले जहाज़) भेजेंगे।
ईरान का पलटवार: “एक भी अमेरिकी सैनिक ज़िंदा वापस नहीं लौटेगा”
डोनाल्ड ट्रंप की इस खुली सैन्य धमकी के बाद ईरान के राजनीतिक और सैन्य गलियारों में उबाल आ गया है। ईरान के नेताओं ने तेल निर्यात के मुख्य केंद्र ‘खार्ग द्वीप’ पर हमले की बात का कड़ा विरोध किया है।
इब्राहिम रेज़ाई (प्रवक्ता, ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति): उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर ट्रंप को सीधे चुनौती देते हुए लिखा, “आइए, हम आपका इंतज़ार कर रहे हैं और हम वादा करते हैं कि एक भी अमेरिकी सैनिक ज़िंदा वापस नहीं लौटेगा।”
अली अकबर वेलायती (ईरान के पूर्व विदेश मंत्री): उन्होंने भी इस ताज़ा तनाव पर तीखी प्रतिक्रिया दी। वेलायती ने ‘X’ पर चेतावनी भरे लहजे में लिखा कि ईरान ने पहले ही साफ कर दिया था कि “यह इलाका छोटे देशों की राजनीतिक जुएबाज़ी की जगह नहीं है और ईरान इस पूरे क्षेत्र को (अमेरिकी प्रभाव से) साफ करने के लिए ट्रिगर पर उंगली रखे तैयार खड़ा है।”
क्यों भड़का यह ताज़ा विवाद?
गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में होर्मुज़ जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों (Commercial Ships) पर हुए हमलों के बाद अमेरिका और ईरान के बीच झड़पें तेज़ हुई हैं। अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों को निशाना बनाया था, जिसके जवाब में ईरान ने भी खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य हितों को निशाना बनाने का दावा किया है। इस ताज़ा बयानबाजी के बाद वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भी भारी उछाल देखने को मिल रहा है और मध्य-पूर्व में एक बार फिर बड़े युद्ध की आशंका मंडराने लगी है।
