उत्तराखंड

बदरीनाथ धाम चढ़ावा विवाद: सड़क पर उतरा जनाक्रोश, बीकेटीसी अध्यक्ष को हटाने की मांग को लेकर कांग्रेस विधायक का मौन व्रत

बदरीनाथ धाम चढ़ावा विवाद: सड़क पर उतरा जनाक्रोश, बीकेटीसी अध्यक्ष को हटाने की मांग को लेकर कांग्रेस विधायक का मौन व्रत

​बदरीनाथ/जोशीमठ: अयोध्या के राम मंदिर के बाद अब उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में सामने आए कथित चढ़ावा और दान चोरी विवाद को लेकर श्रद्धालुओं और स्थानीय जनता का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है. इस मामले में निष्पक्ष जांच और बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी को पद से हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन और आंदोलन तेज हो गए हैं.

​जोशीमठ के मुख्य चौराहे पर जहां सोमवार को स्थानीय लोगों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने प्रदेश सरकार और मंदिर समिति के खिलाफ जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया, वहीं आज बदरीनाथ धाम में इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस विधायक लखपत सिंह बुटोला के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने सिंह द्वार के बाहर एक घंटे का मौन व्रत रखकर अपना विरोध दर्ज कराया.

​सिंह द्वार के बाहर कांग्रेस विधायक का मौन व्रत, SIT जांच की मांग

​बदरीनाथ विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक लखपत सिंह बुटोला और ब्लॉक प्रमुख (ज्योतिर्मठ) अनूप नेगी समेत बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता बदरीनाथ धाम पहुंचे. भगवान बदरी विशाल के दर्शन करने के बाद सभी कार्यकर्ता मंदिर के मुख्य सिंह द्वार के बाहर परिसर में एक घंटे के मौन व्रत पर बैठ गए.

​मौन व्रत के बाद विधायक लखपत बुटोला ने बीकेटीसी प्रशासन और राज्य सरकार पर मामले को दबाने का सीधा आरोप लगाया. उन्होंने कहा:

​”यह केवल पैसों की हेराफेरी या वित्तीय भ्रष्टाचार का मामला नहीं है, बल्कि यह देश-विदेश के करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों की आस्था, हमारी संस्कृति और स्वाभिमान पर बहुत गहरी चोट है. इस पूरे प्रकरण की लीपापोती करने के बजाय सरकार को इसकी उच्च स्तरीय न्यायिक जांच या एसआईटी (SIT) से निष्पक्ष जांच करानी चाहिए.”

​बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी को हटाने के लिए राज्यपाल को ज्ञापन

​जोशीमठ और बदरीनाथ में हुए भारी विरोध-प्रदर्शनों के बाद प्रदर्शनकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने उपजिलाधिकारी (SDM) के माध्यम से सूबे के राज्यपाल को एक आधिकारिक ज्ञापन प्रेषित किया है. इस ज्ञापन में मुख्य रूप से तीन मांगें की गई हैं:

​अध्यक्ष की बर्खास्तगी: बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी को उनके पद से तुरंत हटाया जाए.

​सख्त विधिक कार्रवाई: इस पूरे घोटाले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों को जेल भेजा जाए.

​भविष्य में रोकथाम: पवित्र धामों में ऐसी लज्जाजनक घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएं, क्योंकि ऐसी विसंगतियां श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा रही हैं.

​भैरव सेना के आरोपों के बाद BKTC की 4 सदस्यीय टीम कर रही है जांच

​यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब ‘भैरव सेना’ नाम के एक संगठन ने बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के अधिकारियों और गणना कार्य में लगे कर्मचारियों पर चढ़ावे और दान की धनराशि में भारी आर्थिक हेराफेरी (गबन) करने के गंभीर आरोप लगाए.

​अब तक क्या हुई कार्रवाई?

​जांच समिति का गठन: आरोपों की गंभीरता को देखते हुए बीकेटीसी प्रशासन ने आनन-फानन में एक 4 सदस्यीय आंतरिक जांच समिति का गठन किया है, जो पूरे मामले की विभागीय पड़ताल कर रही है.

​कारण बताओ नोटिस: दान और चढ़ावे की राशि की गिनती (कैलकुलेशन) प्रक्रिया में शामिल रहे सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को कारण बताओ (शो-कॉज) नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है.

​अयोध्या राम मंदिर के बाद बदरीनाथ धाम जैसे पवित्र स्थल पर इस तरह के आरोप सामने आने से तीर्थ पुरोहितों और सनातन धर्म के अनुयायियों में भारी नाराजगी है, और वे अब पारदर्शी जांच के लिए सरकार पर लगातार दबाव बना रहे हैं.

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