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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: कोर्ट ने 3 आरोपियों की एक दिन की पुलिस रिमांड मंजूर की, ट्रस्ट के ढाई साल के खर्चों का होगा ऑडिट

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: कोर्ट ने 3 आरोपियों की एक दिन की पुलिस रिमांड मंजूर की, ट्रस्ट के ढाई साल के खर्चों का होगा ऑडिट

​अयोध्या: अयोध्या के सुप्रसिद्ध राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान की चोरी और गबन के हाई-प्रोफाइल मामले में जांच तेज हो गई है. इस मामले में स्थानीय अदालत ने जेल में बंद तीन मुख्य आरोपियों—अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडे—को एक दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड (PCR) पर भेजने की अनुमति दे दी है. अयोध्या पुलिस ने मामले की गहराई से पूछताछ के लिए अदालत से सात दिनों की रिमांड मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने फिलहाल केवल एक दिन की मंजूरी दी है.

​पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी पुलिस और एसआईटी

​इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) और पुलिस प्रशासन पहले ही कुछ आरोपियों के पास से भारी मात्रा में नकदी और अन्य सामान बरामद कर चुके हैं. अब इस एक दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड के दौरान पुलिस इन तीनों आरोपियों को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ करेगी. पुलिस का मुख्य उद्देश्य बरामद सबूतों, बैंक खातों के विवरण और आरोपियों के बयानों का मिलान करके इस पूरे नेटवर्क की हर एक कड़ी को जोड़ना है.

​क्या है राम मंदिर चढ़ावा चोरी का पूरा मामला?

​यह पूरा मामला राम मंदिर में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा श्रद्धापूर्वक चढ़ाए गए दान की रकम में हेराफेरी और गबन से जुड़ा है:

​8 लोगों के खिलाफ FIR: एसआईटी (SIT) की शुरुआती जांच के बाद इस मामले में कुल आठ लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसके बाद सभी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत (जेल) भेज दिया गया था.

​गिनती के दौरान गबन: जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आरोपी दानपात्रों से निकलने वाली रकम की गिनती के दौरान ही बड़ी राशियों का गबन कर लेते थे.

​चोरी के पैसे से खरीदी संपत्ति: पुलिस और जांच एजेंसियों का दावा है कि कुछ आरोपियों ने इस चोरी के पैसे का इस्तेमाल अपने लिए कीमती संपत्तियां (Plat/Property) खरीदने में किया, जिसकी अलग से जांच की जा रही है.

​राम मंदिर ट्रस्ट के पिछले ढाई साल के खर्चों की होगी गहन जांच

​इस मामले की जांच का दायरा अब केवल चढ़ावा चोरी तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसके तार अन्य वित्तीय लेन-देन से भी जोड़े जा रहे हैं. एसआईटी अब पिछले लगभग ढाई सालों के दौरान श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ऑडिट रिपोर्ट, खर्चों की रसीदों, रसीद बुक, पर्चियों और अन्य सभी खातों की बारीकी से पड़ताल करेगी.

​प्राण प्रतिष्ठा के खर्चों पर विशेष नजर:

इस वित्तीय जांच में सबसे बड़ा फोकस जनवरी 2024 में आयोजित हुए भव्य ‘प्राण प्रतिष्ठा’ कार्यक्रम के दौरान हुए खर्चों पर रहेगा. इस ऐतिहासिक आयोजन के दौरान अयोध्या में टेंट सिटी बसाने, अतिथियों के सत्कार, वीवीआईपी सुरक्षा व्यवस्था और अन्य व्यवस्थाओं में हुए करोड़ों रुपये के खर्च के बिल और रसीदों का मिलान किया जाएगा. गौरतलब है कि इस मामले में एसआईटी ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों और कर्मचारियों से भी लगातार पूछताछ कर रही है, ताकि यह साफ हो सके कि इस लापरवाही या गबन में कहीं अंदरूनी मिलीभगत तो नहीं थी.

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