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चंदा चोरी मामले में इस्तीफे के बाद चंपत राय की पहली प्रतिक्रिया: राम भक्तों के नाम लिखा भावुक पत्र, SIT को सौंपा लिखित बयान

चंदा चोरी मामले में इस्तीफे के बाद चंपत राय की पहली प्रतिक्रिया: राम भक्तों के नाम लिखा भावुक पत्र, SIT को सौंपा लिखित बयान

​अयोध्या: अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एक और बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक उलटफेर देखने को मिला है. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है, जिसे सोमवार को हुई ट्रस्ट की अहम बैठक में स्वीकार कर लिया गया. पद छोड़ने के बाद चंपत राय की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है. उन्होंने राम भक्तों के नाम एक भावुक पत्र लिखा है और साथ ही इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) को अपना विस्तृत लिखित बयान सौंपा है.

​चंपत राय ने अपने पत्र में खुद को निर्दोष बताते हुए कहा है कि उन पर लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह अनुचित हैं और एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद वे हर एक बिंदु पर क्रमवार जवाब देकर पूरा सच सामने लाएंगे.

​राम भक्तों के नाम चंपत राय की चिट्ठी: “मेरा जीवन खुली पुस्तक”

​इस्तीफा देने के बाद चंपत राय ने राम भक्तों को संबोधित करते हुए पत्र में लिखा:

​”पिछले 6 जून 2026 से श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर के दानपात्र की गणना के समय की गयी चोरी के सम्बन्ध में अनेक प्रकार की चर्चाएं चल रही हैं, व्यक्तिगत तौर पर मेरे ऊपर अनेकों ने अनुचित आरोप लगाए हैं. मैंने मौन धारण कर लिया है. मंदिर ट्रस्ट की धांधली को समझने हेतु SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत की गयी. यह रिपोर्ट अब सार्वजनिक हो चुकी है, यद्यपि यह परम गोपनीय थी. अब सभी को आश्वस्त करना है कि SIT की अंतिम रिपोर्ट के बाद फैलाये जा रहे सभी बिन्दुओं पर अपना उत्तर क्रमानुसार दूंगा, सभी सत्य सामने आ जायेगा. मैं वर्ष अक्टूबर 1991 से संगठन द्वारा अयोध्या में भेजा गया, मेरा प्रचारक जीवन 45 वर्ष से, जहाँ-जहाँ मैं रहा खुली पुस्तक के समान है. सभी को आदर पूर्वक नमन.”

​इससे पहले इस्तीफा देते वक्त उन्होंने कहा था कि जब तक असली अपराधी पकड़े नहीं जाते, तब तक उनका इस गरिमामयी पद पर बने रहना नैतिक रूप से सही नहीं है. उन्होंने चढ़ावा चोरी को एक कष्टदायी और लज्जाजनक घटना बताया था.

​SIT को सौंपे बयान में चंपत राय के 4 बड़े खुलासे: बैंक पर मढ़ा दोष

​महासचिव पद से हटने के बाद चंपत राय ने जांच एजेंसियों के सामने अपना पक्ष रखा. उन्होंने एसआईटी को दिए लिखित बयान में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं:

​1. बैंक के दिशा-निर्देशों पर सहमति और हस्ताक्षर नहीं

​चंपत राय ने दावा किया कि 5 फरवरी 2025 को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, अयोध्या शाखा के मुख्य प्रबंधक गोविंद मिश्र द्वारा नोटों की गिनती को लेकर जो दिशा-निर्देश जारी किए गए थे, वे उससे सहमत नहीं थे. इस आधिकारिक पत्र पर उनके हस्ताक्षर भी नहीं हैं, जबकि अगस्त 2020 से जून 2026 तक के अन्य सभी दस्तावेजों पर उनके और ट्रस्ट के अधिकारियों के दस्तखत मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें इस गाइडलाइन की जानकारी भी 13 जून 2026 को अकाउंट ऑफिस से दस्तावेज मिलने के बाद हुई, जबकि नियमों के मुताबिक इसकी प्रति उन्हें पहले ही भेजी जानी चाहिए थी.

​2. सुरक्षा व्यवस्था और MoU के उल्लंघन का आरोप

​बयान के अनुसार, 9 फरवरी 2024 को बैंक के साथ हुए समझौते (MoU) में सुरक्षा के कड़े प्रावधान तय किए गए थे, जैसे:

​गिनती कक्ष (Counting Room) में चौबीसों घंटे सीसीटीवी कैमरे एक्टिव रहना.

​लोहे की सलाखों वाला एक मजबूत सुरक्षा दरवाजा लगाया जाना.

​सभी कर्मचारियों को एक निश्चित मेज पर बिठाकर पारदर्शी तरीके से नोटों की गिनती कराना.

​चंपत राय का आरोप है कि यदि इन तय नियमों और व्यवस्थाओं का जमीनी स्तर पर सही तरीके से पालन किया जाता, तो मंदिर परिसर में चोरी होने की संभावना न के बराबर होती.

​3. चेकिंग में लापरवाही और ‘जेब वाले कपड़े’

​चंपत राय ने सीधे तौर पर बैंक प्रबंधन को घेरते हुए कहा कि गिनती कक्ष में आने और बाहर जाने के समय कर्मचारियों की सघन तलाशी (फ्रिस्किंग) नहीं ली जा रही थी. सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि बिना जेब वाले कपड़े पहनने के सुरक्षा नियम को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया. बैंक द्वारा जो कपड़े कर्मचारियों को दिए गए, उनमें भी जेबें मौजूद थीं, जिसका फायदा उठाकर चोरी को अंजाम दिया गया.

​4. संवेदनशील काम के लिए ‘हाउसकीपिंग स्टाफ’ का चयन

​चंपत राय ने नोटों की गिनती के लिए कर्मचारियों के चयन पर भी गहरी आपत्ति जताई है. उन्होंने एसआईटी से कहा कि चढ़ावे जैसी बेहद संवेदनशील और पवित्र राशि की गिनती के लिए जिन युवकों को चुना गया था, उन्हें महज ‘हाउसकीपिंग स्टाफ’ (सफाई कर्मी) के रूप में रखा गया था. इतने बड़े और जिम्मेदार काम के लिए इस तरह के स्टाफ का उपयोग करना पूरी तरह अनुचित था.

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