राजनीति

राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर बरसे अशोक गहलोत: ‘ट्रस्ट को तुरंत भंग कर नया बोर्ड बने, मोदी चुप्पी तोड़ें’

राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर बरसे अशोक गहलोत: ‘ट्रस्ट को तुरंत भंग कर नया बोर्ड बने, मोदी चुप्पी तोड़ें’

​नई दिल्ली: अयोध्या के श्रीराम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है. कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को देशवासियों की आस्था पर गंभीर आघात बताते हुए कहा है कि इससे सत्तापक्ष का ‘चाल, चरित्र और चेहरा’ पूरी तरह बेनकाब हो गया है.

​नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित एक विशेष पत्रकार वार्ता (PC) को संबोधित करते हुए राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ को तत्काल प्रभाव से भंग करने की मांग की है.

​शंकराचार्यों और धर्माचार्यों को शामिल कर बने नया ट्रस्ट

​पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मांग की कि वर्तमान ट्रस्ट को हटाकर एक नए ट्रस्ट का गठन किया जाना चाहिए. उन्होंने इसके स्वरूप को लेकर कुछ अहम सुझाव और मांगें रखीं:

​धार्मिक प्रतिनिधियों को मिले जगह: नए ट्रस्ट में देश के प्रतिष्ठित शंकराचार्यों, पूज्य धर्माचार्यों, साधु-संतों और असली धार्मिक प्रतिनिधियों को स्थान मिलना चाहिए, न कि किसी राजनीतिक विचारधारा के लोगों को.

​सुप्रीम कोर्ट के जज से हो जांच: इस पूरे चढ़ावा घोटाले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के किसी मौजूदा या सेवानिवृत्त जज की देखरेख में होनी चाहिए.

​चढ़ावे की सूची हो सार्वजनिक: गहलोत ने मांग की कि जिस तरह सुप्रीम कोर्ट के कड़े आदेश के बाद इलेक्टोरल बॉन्ड का डेटा सार्वजनिक करना पड़ा था, ठीक उसी तरह राम मंदिर को अब तक नकदी, सोने-चांदी या अन्य उपहारों के रूप में मिले कुल चढ़ावे की पूरी सूची देश के सामने सार्वजनिक की जाए.

​”अगर सिर्फ लापरवाही थी, तो FIR और गिरफ्तारियां क्यों हुईं?”

​अशोक गहलोत ने ट्रस्ट की हालिया बैठक में इस पूरे मामले को ‘चोरी’ के बजाय महज एक ‘लापरवाही’ बताए जाने पर कड़े तार्किक सवाल उठाए. उन्होंने पूछा:

​”अगर यह मामला सिर्फ लापरवाही का था, तो फिर इस पर एफआईआर (FIR) दर्ज क्यों की गई? आनन-फानन में एसआईटी (SIT) की जांच क्यों बैठानी पड़ी? लोगों की गिरफ्तारियां क्यों हुईं और बड़े अधिकारियों के इस्तीफे होने तथा उन्हें स्वीकार करने की नौबत क्यों आई? ट्रस्ट और सरकार को इस ‘लीपापोती’ को बंद कर एसआईटी की पूरी रिपोर्ट को जनता के सामने रखना चाहिए.”

​उन्होंने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष के हालिया बयान पर भी निशाना साधा, जिसमें कोषाध्यक्ष ने खुद को ‘डमी’ बताते हुए कहा था कि उन्हें किसी एसओपी (SOP) की जानकारी नहीं थी और न ही उन्होंने किसी चेक पर दस्तखत किए थे. गहलोत ने याद दिलाया कि शुरुआत में भी महज 2 करोड़ की जमीन को मिनटों में 18 करोड़ रुपये में खरीदने का घोटाला सामने आया था.

​पीएम मोदी की जवाबदेही पर उठाए सवाल

​वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर भी गहरा ऐतराज जताया. उन्होंने कहा:

​श्रेय लिया तो जिम्मेदारी भी लें: जब श्रीराम मंदिर के निर्माण और इससे जुड़े हर छोटे-बड़े कार्य का पूरा श्रेय खुद प्रधानमंत्री आगे बढ़कर ले रहे थे, तो आज इतने बड़े घोटाले के सामने आने पर वे अपनी नैतिक जवाबदेही से क्यों भाग रहे हैं?

​प्रधानमंत्री तोड़ें चुप्पी: देश के करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री को इस विषय पर अपनी चुप्पी तुरंत तोड़नी चाहिए.

​राम मंदिर किसी एक पार्टी का नहीं, पूरे देश का है

​उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक पुराने बयान पर पलटवार करते हुए अशोक गहलोत ने कहा कि यह उनकी बहुत बड़ी गलतफहमी है कि मंदिर के लिए केवल भाजपा या आरएसएस के लोगों ने ही समर्पण राशि (चंदा) दी थी.

​उन्होंने साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद इस भव्य मंदिर का निर्माण शुरू हुआ था, जिसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी के समर्थकों समेत देश के हर राज्य, हर गांव और हर आम नागरिक ने अपनी गाढ़ी कमाई से चंदा दिया है. प्रभु श्रीराम पूरे देश के हैं और इस चढ़ावा चोरी को लेकर आज देश के गांव-गांव और घर-घर में आम जनता के बीच भारी आक्रोश व्याप्त है.

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