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यूएस-ईरान समझौते पर बढ़ा तनाव: ट्रंप की ‘डील या काम तमाम’ की चेतावनी पर ईरान का पलटवार, “धमकियों से काम नहीं चलेगा”

यूएस-ईरान समझौते पर बढ़ा तनाव: ट्रंप की ‘डील या काम तमाम’ की चेतावनी पर ईरान का पलटवार, “धमकियों से काम नहीं चलेगा”

​वाशिंगटन/तेहरान: मध्य-पूर्व एशिया (Middle East) में फिलहाल ऊपरी तौर पर शांति नजर आ रही है, लेकिन अमेरिका (US) और ईरान के बीच हाल ही में हुआ समझौता कितने दिन तक टिक पाएगा, इसे लेकर वैश्विक स्तर पर असमंजस गहरा गया है. इस तनाव की मुख्य वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तीखी बयानबाजी और उस पर ईरान की ओर से आ रही आक्रामक प्रतिक्रियाएं हैं.

​सोमवार को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बड़ा बयान दिया, जिस पर पलटवार करते हुए ईरानी विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची ने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि धमकियों के साए में कोई बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी.

​”या तो डील होगी या ईरान का काम तमाम” — डोनाल्ड ट्रंप

​अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ओवल ऑफिस में मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए बेहद सख्त रुख अख्तियार किया, हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि वे युद्ध नहीं चाहते. ट्रंप ने कहा:

​”अमेरिका या तो ईरान के साथ अंतिम समझौता करेगा या फिर उसका ‘काम तमाम’ करेगा. हमारे पास केवल यही दो रास्ते हैं. मैं ईरान के साथ युद्ध या कोई सैन्य कार्रवाई नहीं चाहता, मैं तो एक नई डील करना चाहूंगा क्योंकि मैं नहीं चाहता कि वहां के 91 मिलियन (9.1 करोड़) लोगों की जिंदगी प्रभावित हो. लेकिन ईरान को यह समझना होगा कि अगर हम चाहें तो महज एक घंटे के भीतर उनके सारे ब्रिज उड़ा सकते हैं और उनकी पूरी एनर्जी सप्लाई (ऊर्जा आपूर्ति) को ध्वस्त कर सकते हैं. उनके पास कभी बहुत पैसा होता था, लेकिन अब कुछ नहीं है. हमने उन्हें एक पैसा नहीं दिया है.”

​”धमकी जारी रही, तो अंतिम समझौते पर बात नहीं होगी” — ईरान

​डोनाल्ड ट्रंप की इस खुली चेतावनी पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर कड़ा प्रतिवाद किया. उन्होंने दोनों देशों के बीच हुए हालिया समझौता ज्ञापन (MoU) का हवाला देते हुए अमेरिका को उसके वादे याद दिलाए:

​एमओयू के पैराग्राफ 13 का हवाला: अराघची ने स्पष्ट किया कि यदि अमेरिका की ओर से धमकियों का यह सिलसिला बंद नहीं हुआ, तो आगामी ‘अंतिम समझौते’ (Final Agreement) के लिए बातचीत की शुरुआत ही नहीं की जाएगी. उन्होंने एमओयू के पैराग्राफ 13 का जिक्र करते हुए अमेरिका से कहा कि वह अपने हस्ताक्षरों और वादों का सम्मान करे.

​सशस्त्र सेनाएं नहीं डरेंगी: ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि न तो ईरान की जनता और न ही उनकी बहादुर सशस्त्र सेनाएं किसी भी तरह की गीदड़भभकी या धमकियों के आगे झुकने वाली हैं.

​सर्वोच्च नेता आयतुल्ला खामेनेई के अंतिम संस्कार का जिक्र

​अपने बयान में विदेश मंत्री अराघची ने देश की एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए यह भी साझा किया कि “लाखों गौरवान्वित ईरानी” अपने सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए एकत्र हो रहे हैं. उन्होंने इस भावुक और ऐतिहासिक क्षण का हवाला देते हुए वाशिंगटन को संदेश दिया कि दबाव की राजनीति के जरिए ईरान से अपनी शर्तें नहीं मनवाई जा सकतीं.

​विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच हुआ यह प्रारंभिक समझौता बेहद नाजुक मोड़ पर है, और यदि ट्रंप प्रशासन का यही आक्रामक रुख रहा, तो मध्य-पूर्व में शांति बहाली की कोशिशों को बड़ा झटका लग सकता है.

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