नर्मदा नदी परियोजना का दशकों पुराना विवाद सुलझा: अमित शाह की बैठक में चार राज्यों के बीच बनी सहमति
नर्मदा नदी परियोजना का दशकों पुराना विवाद सुलझा: अमित शाह की बैठक में चार राज्यों के बीच बनी सहमति
नई दिल्ली: नर्मदा नदी परियोजना (Narmada River Project) से जुड़े वर्षों पुराने और जटिल विवाद को सुलझाने की दिशा में मंगलवार को एक बड़ी और ऐतिहासिक सफलता मिली है. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र ने नर्मदा परियोजना से जुड़े सभी लंबित मुद्दों के समाधान पर अपनी आपसी सहमति जता दी है.
इस ऐतिहासिक समझौते के तहत परियोजना से प्रभावित लोगों के विस्थापन, भूमि मुआवजे और राज्यों के बीच लंबित भुगतानों से जुड़े मामलों का पूरी तरह निपटारा किया जाएगा.
परियोजना के प्रभावित परिवारों को मिलेगा पूरा हक और मुआवजा
इस महत्वपूर्ण बैठक में नर्मदा नदी के जल-प्लावित (डूब) क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के पुनर्वास और जमीन के मुआवजे को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवादों पर गहन चर्चा हुई. अधिकारियों के मुताबिक:
मुआवजे का रास्ता साफ: चारों राज्यों ने आपसी समन्वय से इस संवेदनशील मुद्दे को सुलझाने पर सहमति व्यक्त की है.
दशकों पुरानी समस्या का अंत: यह विवाद कई दशकों से लंबित था, जिसके कारण प्रभावित परिवारों को अपने उचित मुआवजे, पुनर्वास और अन्य मूलभूत अधिकारों के लिए लंबे समय तक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था. अब इस समझौते से उन्हें त्वरित राहत मिलेगी.
बैठक में मौजूद रहे केंद्रीय मंत्री और चार राज्यों के मुख्यमंत्री
नई दिल्ली में आयोजित इस अहम बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल भी मौजूद रहे. इसके अलावा, परियोजना से जुड़े चारों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने व्यक्तिगत रूप से इस बैठक में हिस्सा लिया और विवाद के सर्वमान्य समाधान पर हस्ताक्षर किए:
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा
सभी मुख्यमंत्रियों ने केंद्रीय नेतृत्व के मार्गदर्शन में इस विवाद को हमेशा के लिए समाप्त करने की प्रतिबद्धता दोहराई.
सहकारी संघवाद की भावना और जल विवादों में तेजी से समाधान
बैठक के दौरान अधिकारियों ने जानकारी दी कि हाल के समय में राज्यों के बीच दशकों से लंबित पड़े अंतर-राज्यीय जल विवादों (Inter-State Water Disputes) को सुलझाने में देश ने महत्वपूर्ण प्रगति की है. नर्मदा विवाद के अलावा हाल ही में सुलझाए गए कुछ प्रमुख उदाहरण इस प्रकार हैं:
हिमाचल प्रदेश की किशाऊ बांध परियोजना का विवाद.
राजस्थान और हरियाणा के बीच लंबे समय से चला आ रहा यमुना जल विवाद.
”पानी पर हर भारतीय का हक”:
केंद्र सरकार की ओर से इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि पानी का उपयोग देश के किसी भी हिस्से में हो, लेकिन उससे लाभ पाने वाला हर व्यक्ति भारतीय है. इसी सोच के साथ राज्यों के बीच आपसी सहयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है.
जल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम
केंद्र सरकार ने इस समझौते को ‘सहकारी संघवाद’ (Cooperative Federalism) का एक अनूठा और बेहतरीन उदाहरण बताया है. सरकार के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की जल सुरक्षा को मजबूत करने और जल क्षेत्र में अंतर-राज्यीय सहयोग बढ़ाने के लिए लगातार कई प्रयास किए जा रहे हैं. राज्यों के बीच बेहतर तालमेल और राजनीतिक इच्छाशक्ति के कारण ही वर्षों से फाइलों में दबे विवादों का समाधान अब धरातल पर तेजी से देखने को मिल रहा है.
