उत्तराखंड कांग्रेस में बगावत: निष्कासित नेताओं के तेवर हुए उग्र, विधायक मयूख महर को घेरते हुए दिल्ली दरबार जाने का किया एलान
उत्तराखंड कांग्रेस में बगावत: निष्कासित नेताओं के तेवर हुए उग्र, विधायक मयूख महर को घेरते हुए दिल्ली दरबार जाने का किया एलान
पिथौरागढ़/देहरादून: उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) द्वारा पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोप में जिले के तीन वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं को 6 साल के लिए बाहर का रास्ता दिखाए जाने के बाद सूबे की सियासत गरमा गई है. पार्टी से निष्कासित किए गए तीनों नेताओं ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस (PC) कर इस कार्रवाई को पूरी तरह गलत, एकतरफा और षडयंत्र का हिस्सा बताया है.
पार्टी के इस कड़े फैसले के खिलाफ अब इन नेताओं ने सीधे दिल्ली कूच करने का मन बना लिया है, जहां वे कांग्रेस आलाकमान (पार्टी हाईकमान) और उत्तराखंड की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा से मिलकर अपनी व्यथा और पक्ष रखेंगे. निष्कासित नेताओं के इन तीखे तेवरों से साफ है कि कांग्रेस का यह अंदरूनी विवाद जल्दी ठंडा होने वाला नहीं है.
’मंच पर मौजूद विधायक पर क्यों नहीं हुई कार्रवाई?’ — महेंद्र सिंह लुंठी
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व दर्जा राज्य मंत्री महेंद्र सिंह लुंठी ने संगठन के फैसले पर गंभीर सवाल उठाते हुए स्थानीय विधायक मयूख महर को कटघरे में खड़ा किया. उन्होंने कहा:
”पार्टी ने हमारे साथ न्याय नहीं किया, बल्कि एकतरफा कार्रवाई की है. यदि स्वागत बैठक में अनुशासनहीनता हुई और कार्रवाई होनी ही थी, तो मंच पर स्थानीय विधायक भी बैठे थे और वह भी बीच मंच से उठकर चले गए थे. उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? जब मैंने इस बारे में प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल से पूछा, तो मुझे गोलमोल जवाब मिला. अनुशासन समिति के प्रदेश अध्यक्ष नव प्रभात के सामने भी हमारा पक्ष नहीं रखा गया. मैं राज्य आंदोलनकारी और छात्र नेता रहा हूं, मैंने कई लड़ाइयां लड़ी हैं और अब इस अन्याय के खिलाफ लड़ाई को दिल्ली तक लेकर जाऊंगा.”
उन्होंने बिना नाम लिए विधायक पर आरोप लगाया कि नगर निगम चुनाव में पार्टी के खिलाफ निर्दलीय प्रत्याशी खड़ा करने वालों पर तो कोई कार्रवाई नहीं की गई, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष के स्वागत कार्यक्रम में मौजूद वफादार कार्यकर्ताओं को बलि का बकरा बना दिया गया.
’जिलाध्यक्ष का तथाकथित नोटिस मुझे मान्य नहीं’ — भावना नगरकोटी
महिला मोर्चा की अध्यक्ष भावना नगरकोटी ने भी इस पूरी कार्रवाई को एक सोची-समझी साजिश करार दिया. उन्होंने अपने निष्कासन को खारिज करते हुए कहा:
”मुझे जिलाध्यक्ष द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से एक तथाकथित नोटिस मिला, जो मुझे बिल्कुल भी मान्य नहीं है. उस नोटिस पर हमारी राष्ट्रीय अध्यक्ष अल्का लांबा के हस्ताक्षर तक नहीं हैं. मुझ पर अनुशासनहीनता का आरोप पूरी तरह निराधार है. मैं तो केवल निकाय चुनावों में स्थानीय विधायक द्वारा की गई बगावत का सच प्रदेश अध्यक्ष के सामने रखना चाहती थी. खुद जिलाध्यक्ष ने मुझे बोलने के लिए मंच पर आमंत्रित किया था, लेकिन बाद में सोचे-समझे षडयंत्र के तहत मुझे बोलने नहीं दिया गया. मैं चुप नहीं बैठूंगी और अपनी बात दिल्ली में पार्टी हाईकमान के सामने रखूंगी.”
”क्या विधायक से डर रहा है पार्टी हाईकमान?” — दीपक लुंठी
पीसीसी (PCC) सदस्य दीपक लुंठी ने भी संगठन की निष्पक्षता पर तीखा हमला बोला. उन्होंने सवाल दागते हुए कहा कि जो विधायक पिछले चार सालों से लगातार यह कहते आ रहे थे कि उनका पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है, वे अचानक प्रदेश अध्यक्ष के कार्यक्रम में मंच पर कैसे पहुंच गए?
उन्होंने विधायक के अतीत के घटनाक्रमों को याद दिलाते हुए कहा:
रैली से दूरी: पूर्व में जब राहुल गांधी की अल्मोड़ा में महत्वपूर्ण रैली थी, तब स्थानीय विधायक वहां नहीं गए थे.
निर्दलीयों को समर्थन: पिछले निकाय चुनावों में उन्होंने खुलेआम कांग्रेस उम्मीदवारों के बजाय निर्दलीयों का समर्थन किया था.
दीपक लुंठी ने आक्रोश जताते हुए पूछा, “क्या पार्टी हाईकमान स्थानीय विधायक से डर रहा है? कार्रवाई हम पर नहीं, बल्कि विधायक पर होनी चाहिए. अब पार्टी के भीतर ऐसी हिटलरशाही बिल्कुल नहीं चलेगी.”
कांग्रेस की अंतर्कलह पर भाजपा की नजर
उत्तराखंड कांग्रेस के भीतर मचे इस घमासान और वरिष्ठ नेताओं के निष्कासन को भारतीय जनता पार्टी (BJP) एक बड़े राजनीतिक अवसर के रूप में देख रही है. भाजपा नेताओं का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस की यह गुटबाजी और अंतर्कलह जगजाहिर होने से आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा को अपनी स्थिति और मजबूत करने में मदद मिलेगी. बहरहाल, अब सभी की नजरें दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान और कुमारी शैलजा के रुख पर टिकी हैं.
