टीएमसी में महासंग्राम: सांसद कल्याण बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ खोला मोर्चा, ममता को दिया अल्टीमेटम— “दीदी! अब मेरे और अभिषेक में से किसी एक को चुनो”
टीएमसी में महासंग्राम: सांसद कल्याण बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ खोला मोर्चा, ममता को दिया अल्टीमेटम— “दीदी! अब मेरे और अभिषेक में से किसी एक को चुनो”
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद चौतरफा बगावत झेल रहीं तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। अब पार्टी के बेहद कद्दावर नेता, वरिष्ठ सांसद और सीनियर एडवोकेट कल्याण बनर्जी के सुर भी बागी हो गए हैं। उन्होंने ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर तीखा हमला बोलते हुए उनके घमंडी रवैये को पार्टी की बर्बादी का कारण बताया है।
”अभिषेक का घमंड राजाओं जैसा, बुरे वक्त में भी अहंकार नहीं गया”
कल्याण बनर्जी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें वे बेहद गुस्से और आहत नजर आ रहे हैं। उन्होंने अभिषेक बनर्जी पर सीधा निशाना साधते हुए कहा:
”यह मेरे लिए बहुत अपमानजनक है। उनके घमंडी रवैये ने पूरी पार्टी को बर्बाद कर दिया है, उन्हें यह समझना चाहिए। उनके गलत व्यवहार ने सब कुछ खत्म कर दिया है। उन्हें हर दिन लगता है कि वे राजा हैं— बुरे समय में भी! जब मैं पार्टी के लिए और ममता बनर्जी के साथ खड़ा हूं, तो अभिषेक बनर्जी के इस घमंडी रवैये के कारण मेरे लिए काम करना नामुमकिन हो गया है।”
ममता बनर्जी को सीधी चेतावनी: “अभिषेक या मैं— दीदी अब फैसला करें”
कल्याण बनर्जी ने साफ शब्दों में ममता बनर्जी को असमंजस की स्थिति से बाहर निकलने और फैसला करने की चुनौती दी है। उन्होंने कहा:
पार्टी छोड़ने के संकेत: “मैं ममता बनर्जी के साथ हूँ, लेकिन अब उन्हें यह तय करना होगा कि अगर वे अभिषेक के बिना पार्टी नहीं चला सकतीं, तो फिर मैं उनके साथ नहीं हूँ।”
भरोसे का संकट: टीएमसी में रहने के सवाल पर उन्होंने दोहराया, “मैं ममता बनर्जी के साथ हूँ। लेकिन अब दीदी को तय करना होगा कि वह मुझे साथ रखेंगी या अभिषेक बनर्जी को।”
सीनियर वकील का अपमान: “जूनियर एडवोकेट क्या सोचेंगे?”
कानूनी और अदालती मामलों में दरकिनार किए जाने से नाराज कल्याण बनर्जी ने अपनी भड़ास निकालते हुए कहा कि किसी भी कानूनी मामले में उनसे कोई सलाह नहीं ली गई और सारे मामले एक ही व्यक्ति (अभिषेक बनर्जी) द्वारा हैंडल किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा, “मैं अब कोर्ट के सामने पेश नहीं होऊँगा। क्या कोई सीनियर वकील के साथ ऐसा सलूक करता है? किशोर दत्ता और सब्यसाची जैसे जूनियर वकील अब क्या सोचेंगे? अभिषेक को समझना होगा कि उनके अहंकार ने सब खत्म कर दिया।”
चौतरफा बगावत से घिरीं ममता बनर्जी: पार्टी के वजूद पर संकट
कल्याण बनर्जी का यह हमला ऐसे समय में आया है जब तृणमूल कांग्रेस पूरी तरह बिखरने की कगार पर है। पार्टी के अंदर तीनों सदनों में विद्रोह छिड़ा हुआ है:
विधानसभा में टूट: टीएमसी के जीते हुए 80 विधायकों में से 58 विधायकों ने अलग गुट बना लिया है और ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुन लिया है।
लोकसभा में बगावत: टीएमसी के करीब 19 लोकसभा सांसदों ने अलग गुट बनाने की कवायद शुरू कर दी है और स्पीकर को पत्र लिखा है।
राज्यसभा से इस्तीफे: टीएमसी के राज्यसभा सांसदों में भगदड़ मची है। सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव के बाद अब प्रकाश चिक बराइक ने भी राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया है।
खास बात यह है कि बगावत करने वाले लगभग सभी नेता अभिषेक बनर्जी के व्यवहार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, लेकिन ममता बनर्जी पर सीधा हमला करने से बच रहे हैं।
बंगाल में ऐतिहासिक बदलाव: 80 सीटों पर सिमटी TMC, शुभेंदु के हाथ कमान
पिछले 15 सालों से बंगाल की सत्ता पर काबिज तृणमूल कांग्रेस को हालिया विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक और करारी हार का सामना करना पड़ा है। 200 से अधिक सीटें जीतने का दावा करने वाली टीएमसी महज 80 सीटों पर सिमट गई। खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी पारंपरिक नंदीग्राम सीट से चुनाव हार गईं।
इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 208 सीटें जीतकर पहली बार बंगाल में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई है। कभी ममता के सबसे खास सिपहसालार रहे शुभेंदु अधिकारी ने अब राज्य की कमान संभाल ली है।
क्या शिवसेना जैसा होगा टीएमसी का हश्र?
कभी ममता बनर्जी की परछाई मानी जाने वाली काकोली घोष दस्तीदार, सुष्मिता देव और शताब्दी रॉय जैसी कद्दावर महिला नेत्री भी अब दूसरे पाले में खड़ी दिखाई दे रही हैं। टीएमसी के बागी नेता लगातार मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के संपर्क में हैं और उनके साथ गुप्त बैठकें कर रहे हैं।
पार्टी के भीतर अब सबसे बड़ा डर यह है कि कहीं बागी खेमा ही खुद को ‘असली तृणमूल कांग्रेस’ घोषित न कर दे। राजनीतिक विश्लेषक इसकी तुलना महाराष्ट्र के उस घटनाक्रम से कर रहे हैं, जहां शिवसेना में दोफाड़ होने के बाद उद्धव ठाकरे को पछाड़कर एकनाथ शिंदे ने पूरी पार्टी और चुनाव चिन्ह पर कब्जा कर लिया था।
