भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर भारी तनाव: BSF ने नाकाम की घुसपैठ, लेकिन बांग्लादेशी फोर्स ने नागरिक को वापस लेने से किया इनकार; ‘नो-मैन्स लैंड’ में फंसा शख्स
भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर भारी तनाव: BSF ने नाकाम की घुसपैठ, लेकिन बांग्लादेशी फोर्स ने नागरिक को वापस लेने से किया इनकार; ‘नो-मैन्स लैंड’ में फंसा शख्स
भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर घुसपैठ को लेकर एक नया और गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। मेघालय सीमा पर बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के जवानों के बीच एक कथित घुसपैठिए को वापस लेने की बात पर जमकर तीखी बहस हुई। इस घटना के बाद मेघालय के साउथ वेस्ट गारो हिल्स जिले में महेंद्रगंज के पास नंदिरचर बॉर्डर पर अचानक तनाव पैदा हो गया।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, मेघालय बॉर्डर से गैर-कानूनी तरीके से भारतीय सीमा में घुसे एक बांग्लादेशी नागरिक को बीएसएफ के जवानों ने पकड़ लिया था। सुरक्षा बलों के तय नियमों (Standard Procedure) के मुताबिक, बीएसएफ ने उसे वापस बांग्लादेशी सीमा की तरफ भेज दिया (पुशबैक किया)। लेकिन बांग्लादेशी अधिकारियों और वहां की सीमा सुरक्षा बल (BGB) ने उस नागरिक को अपना मानने और वापस लेने से साफ इनकार कर दिया।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, जवानों के बीच तीखी नोकझोंक
इस पूरी घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में बांग्लादेश के जमालपुर सेक्टर की BGB और भारतीय BSF के जवान उस शख्स की नागरिकता और पहचान को लेकर आमने-सामने बहस करते दिखाई दे रहे हैं। दोनों तरफ के जवानों के बीच हुई इस तीखी नोकझोंक के बाद कुछ समय के लिए अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई।
’नो-मैन्स लैंड’ में फंसा 55 वर्षीय बांग्लादेशी हिंदू
बीएसएफ सूत्रों के मुताबिक, हिरासत में लिया गया शख्स बांग्लादेश का ही नागरिक है और वह एक अल्पसंख्यक (हिंदू) है।
पहचान: पकड़े गए 55 वर्षीय शख्स की पहचान सती राजबंशी के रूप में हुई है।
पता: वह बांग्लादेश के राजशाही जिले के गुडागारी पुलिस स्टेशन के अंतर्गत चालना गांव (नारायणपुर पोस्ट ऑफिस) का रहने वाला है।
आधिकारिक सूत्रों का दावा है कि इस शख्स को पहले बांग्लादेश में उसके गांव से ही पकड़ा गया था और बाद में उसे भारतीय सीमा में धकेलने की कोशिश की गई थी।
फ्लैग मीटिंग भी रही बेनतीजा
सीमा पर उपजे तनाव को शांत करने के लिए बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के बीच एक फ्लैग मीटिंग भी आयोजित की गई, लेकिन इसके बावजूद यह मामला सुलझ नहीं सका। बांग्लादेशी अधिकारियों के अड़ियल रुख के कारण वह बुजुर्ग शख्स अब भी दोनों देशों के बीच की खाली जमीन यानी ‘नो-मैन्स लैंड’ में फंसा हुआ है।
इस घटना ने सीमा पर अवैध घुसपैठ, पुशबैक की समस्याओं और बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों के साथ हो रहे व्यवहार को लेकर चल रही बहस को एक बार फिर गरमा दिया है।
घुसपैठियों के खिलाफ भारत में एक्शन तेज
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब पूर्वोत्तर राज्यों, विशेषकर असम में बिना दस्तावेजों वाले अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ अभियान बेहद तेज है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि साल 2026 में अवैध घुसपैठ के खिलाफ और भी सख्त कदम उठाए जाएंगे और देश में गैर-कानूनी तरीके से रह रहे नागरिकों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया जारी रहेगी।
