टीएमसी को एक और झटका: राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने दिया इस्तीफा, राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल
टीएमसी को एक और झटका: राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने दिया इस्तीफा, राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के लिए मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने अपने राज्यसभा सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस कदम के बाद राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
बताया जा रहा है कि सुष्मिता देव ने राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन को पत्र लिखकर अपना इस्तीफा सौंपा और उसे तत्काल प्रभाव से स्वीकार करने का अनुरोध किया। इस्तीफे के बाद उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) की प्रोफाइल में भी बदलाव किया है, जहां उन्होंने स्वयं को पूर्व लोकसभा सांसद और पूर्व राज्यसभा सांसद बताया है।
टीएमसी में बढ़ी राजनीतिक हलचल
सुष्मिता देव का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब टीएमसी के भीतर असंतोष और संगठनात्मक चुनौतियों की चर्चा तेज है। इससे पहले पार्टी के वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर राय के इस्तीफे की खबर भी सामने आई थी। वहीं, लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार द्वारा पार्टी के विभिन्न पदों से इस्तीफा दिए जाने के बाद भी राजनीतिक हलकों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
ममता बनर्जी की कोशिशें जारी
इस बीच मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी पार्टी को एकजुट बनाए रखने की कोशिशों में जुटी हुई हैं। हाल ही में उनकी कांग्रेस नेता सोनिया गांधी से मुलाकात भी हुई थी, जिसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कांग्रेस से टीएमसी तक का सफर
सुष्मिता देव ने वर्ष 2021 में कांग्रेस छोड़कर टीएमसी का दामन थामा था। कांग्रेस में वह ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की अध्यक्ष रह चुकी हैं। इसके अलावा वह असम की सिलचर लोकसभा सीट से सांसद भी रह चुकी हैं।
बीजेपी में शामिल होने की अटकलें
सुष्मिता देव की असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ मुलाकात की तस्वीर सामने आने के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं कि वह भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हो सकती हैं। हालांकि, इस संबंध में अभी तक न तो सुष्मिता देव और न ही बीजेपी की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है।
फिलहाल, सुष्मिता देव के इस्तीफे ने बंगाल और राष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है और सभी की नजरें उनके अगले राजनीतिक कदम पर टिकी हुई हैं।
