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200 करोड़ रुपये मनी लॉन्ड्रिंग मामला: जैकलीन फर्नांडिस पहुंचीं सुप्रीम कोर्ट, ट्रायल कोर्ट के आदेश को दी चुनौती

200 करोड़ रुपये मनी लॉन्ड्रिंग मामला: जैकलीन फर्नांडिस पहुंचीं सुप्रीम कोर्ट, ट्रायल कोर्ट के आदेश को दी चुनौती

नई दिल्ली: 200 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बॉलीवुड अभिनेत्री Jacqueline Fernandez ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अभिनेत्री ने दिल्ली की ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनके खिलाफ आरोप तय करने का निर्देश दिया गया था।

जैकलीन फर्नांडिस ने सीधे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द करने की मांग की है। उनकी ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि आरोप तय करने के आदेश में कई कानूनी त्रुटियां हैं और मामले की दोबारा समीक्षा की आवश्यकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताते हुए मामले को 11 जून के लिए सूचीबद्ध किया है। जस्टिस P. K. Mishra और जस्टिस A. S. Chandurkar की पीठ ने जल्द सुनवाई की मांग पर विचार करते हुए यह तारीख निर्धारित की।

यह मामला 200 करोड़ रुपये की कथित जबरन वसूली और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग आरोपों से संबंधित है। हाल ही में ट्रायल कोर्ट ने मामले में जैकलीन फर्नांडिस के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था, जिसके खिलाफ उन्होंने सर्वोच्च अदालत का रुख किया है।

अब सुप्रीम Court इस बात पर विचार करेगा कि ट्रायल कोर्ट द्वारा पारित आदेश कानूनी रूप से उचित था या नहीं और क्या मामले की आगे की कार्यवाही उसी आधार पर जारी रखी जानी चाहिए।

इससे पहले 3 जून को जैकलीन फर्नांडिस इस मामले में दिल्ली की Patiala House Courts में पेश हुई थीं। वहां उन्होंने अपने खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों से इनकार किया था।

मामला कथित तौर पर हाई-प्रोफाइल ठग Sukesh Chandrasekhar से जुड़ा है। आरोप है कि उसने जेल में रहते हुए एक कारोबारी की पत्नी से लगभग 200 करोड़ रुपये की जबरन वसूली की थी।

जांच एजेंसी Enforcement Directorate (ईडी) का दावा है कि कथित वसूली से प्राप्त धन का एक हिस्सा जैकलीन फर्नांडिस और उनके परिवार पर खर्च किया गया। एजेंसी के अनुसार, सुकेश चंद्रशेखर ने अभिनेत्री को कई महंगे उपहार दिए थे, जिनमें लग्जरी कारें, ब्रांडेड हैंडबैग, कीमती आभूषण और अन्य मूल्यवान वस्तुएं शामिल थीं।

नोट: मामले की सुनवाई अभी न्यायालय में लंबित है। आरोपों की सत्यता और कानूनी जिम्मेदारी पर अंतिम निर्णय अदालत के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगा।

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