बंगाल का महासंग्राम: पहले चरण की वे 5 बड़ी बातें, जो तय करेंगी सत्ता का भविष्य
बंगाल का महासंग्राम: पहले चरण की वे 5 बड़ी बातें, जो तय करेंगी सत्ता का भविष्य
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण का बिगुल बज चुका है। 23 अप्रैल को होने वाले इस मतदान में 152 सीटों पर किस्मत का फैसला होना है। उत्तर बंगाल से लेकर दक्षिण के कुछ हिस्सों तक फैले इस चरण को ‘सत्ता का प्रवेश द्वार’ माना जा रहा है। राजनीतिक पंडितों की मानें तो पहले चरण की लहर ही नई विधानसभा की शक्ल तय करेगी।
पेश है पहले चरण की वे खास बातें, जो इस चुनाव को बेहद दिलचस्प बना रही हैं:
1. नंदीग्राम का ‘हाई-वोल्टेज’ मुकाबला
पहले ही चरण में सूबे की सबसे चर्चित सीट नंदीग्राम पर वोट डाले जाएंगे। यहाँ भाजपा के कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पवित्र कर के बीच सीधी टक्कर है। शुभेंदु के लिए यह साख की लड़ाई है, वहीं ममता बनर्जी की पार्टी के लिए यह सीट वापस पाना प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है।
2. उत्तर बंगाल: भाजपा का किला या TMC की वापसी?
पहले चरण में उत्तर बंगाल की दार्जीलिंग, जलपाईगुड़ी, कूचबिहार और सिलिगुड़ी जैसी महत्वपूर्ण सीटें शामिल हैं। 2021 में यहाँ भाजपा ने एकतरफा बढ़त बनाई थी। इस बार देखना होगा कि क्या भाजपा अपना गढ़ बचा पाती है या TMC की ‘लोकप्रिय योजनाओं’ (जैसे लक्ष्मी भंडार) का जादू यहाँ चलेगा।
3. दागी उम्मीदवारों और धनबल का प्रभाव
ADR की हालिया रिपोर्ट ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। पहले चरण के 23% उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
भाजपा: 70% उम्मीदवारों पर मामले।
TMC: 43% उम्मीदवारों पर मामले।
इसके अलावा, मैदान में 309 करोड़पति उम्मीदवार हैं, जिनमें सबसे अमीर उम्मीदवार जाकिर हुसैन (जंगीपुर) हैं, जिनकी संपत्ति ₹133 करोड़ से अधिक है।
4. ‘RG Kar’ मामले का भावनात्मक असर
इस चुनाव में ‘महिला सुरक्षा’ एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है। भाजपा ने पानीहाटी सीट से आरजी कर मेडिकल कॉलेज की मृत डॉक्टर की माँ, रत्ना देबनाथ को टिकट देकर एक बड़ा भावनात्मक दांव खेला है। यह मुद्दा पूरे बंगाल, खासकर शहरी इलाकों के वोटिंग पैटर्न को प्रभावित कर सकता है।
5. त्रिकोणीय संघर्ष की आहट
भले ही मुख्य मुकाबला TMC और भाजपा के बीच दिख रहा हो, लेकिन वाम मोर्चा (Left Front) और कांग्रेस का गठबंधन कई सीटों पर खेल बिगाड़ सकता है। मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे इलाकों में कांग्रेस की पकड़ और वामपंथियों का कैडर वोट यह तय करेगा कि एंटी-इंकम्बेंसी (सत्ता विरोधी लहर) का वोट किसके खाते में जाता है।
ग्राउंड रिपोर्ट: “पहले चरण में ‘अस्मिता’ और ‘अधिकार’ की जंग है। उत्तर बंगाल में चाय बागान के मुद्दे हावी हैं, तो दक्षिण में भ्रष्टाचार और सुरक्षा। जो यहाँ जीता, कोलकाता की कुर्सी उसके करीब होगी।”
