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बच्चों में बढ़ रहा ‘साइलेंट किलर’: फैटी लिवर की गिरफ्त में मासूम, डॉक्टर ने दी चेतावनी

बच्चों में बढ़ रहा ‘साइलेंट किलर’: फैटी लिवर की गिरफ्त में मासूम, डॉक्टर ने दी चेतावनी

​नई दिल्ली/हेल्थ डेस्क: अब तक ‘फैटी लिवर’ को केवल वयस्कों और शराब पीने वालों की बीमारी माना जाता था, लेकिन बदलते दौर में यह धारणा बदल चुकी है। हालिया मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार, बच्चों में नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यदि समय रहते ध्यान न दिया गया, तो यह लिवर सिरोसिस जैसी जानलेवा स्थिति में बदल सकता है।

​क्यों बढ़ रहे हैं बच्चों में मामले?

​विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे कोई एक कारण नहीं बल्कि आधुनिक जीवनशैली के कई कारक जिम्मेदार हैं:

​अत्यधिक जंक फूड: पिज्जा, बर्गर और प्रोसेस्ड फूड का बढ़ता सेवन।

​शुगर ड्रिंक्स: सोडा, कोल्ड ड्रिंक्स और डिब्बाबंद जूस में मौजूद ‘फ्रुक्टोज’ लिवर में चर्बी जमा करता है।

​शारीरिक निष्क्रियता: आउटडोर खेलों की जगह मोबाइल और वीडियो गेम्स ने ले ली है।

​मोटापा: बच्चों में बढ़ता वजन फैटी लिवर का सबसे बड़ा संकेत है।

​फैटी लिवर के लक्षण (लक्षण जो नजरअंदाज न करें)

​शुरुआत में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते, लेकिन कुछ संकेतों से इसे पहचाना जा सकता है:

​पेट के ऊपरी दाएं हिस्से में हल्का दर्द रहना।

​हर समय थकान और सुस्ती महसूस करना।

​गर्दन के पीछे या बगल में त्वचा का काला पड़ना (Acanthosis Nigricans)।

​भूख कम लगना या पाचन में समस्या।

​डॉक्टर के सुझाव: बचाव के 5 कारगर तरीके

​प्रसिद्ध बाल रोग विशेषज्ञों (Pediatricians) ने बच्चों को इस बीमारी से बचाने के लिए निम्नलिखित उपाय बताए हैं:

​’नो शुगर’ पॉलिसी: बच्चों की डाइट से रिफाइंड शुगर और कोल्ड ड्रिंक्स को पूरी तरह हटा दें। इसकी जगह ताजे फल और पानी दें।

​60 मिनट का खेल: हर बच्चे के लिए दिन में कम से कम एक घंटा पसीना बहाना अनिवार्य होना चाहिए। साइकिल चलाना, दौड़ना या तैरना सबसे बेहतर है।

​स्क्रीन टाइम कम करें: मोबाइल और टीवी देखने का समय सीमित करें ताकि बच्चा सक्रिय रह सके।

​संतुलित आहार: खाने में हरी सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन को शामिल करें। रात का खाना सोने से कम से कम 2-3 घंटे पहले खिलाएं।

​नियमित चेकअप: यदि बच्चा ओवरवेट है, तो डॉक्टर की सलाह पर लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) और अल्ट्रासाउंड जरूर करवाएं।

​एक्सपर्ट की राय

​”फैटी लिवर को दवाओं से ज्यादा जीवनशैली में सुधार (Lifestyle Modification) से ठीक किया जा सकता है। बच्चों का लिवर अभी विकास की अवस्था में होता है, इसलिए शुरुआती बदलाव चमत्कारिक परिणाम दे सकते हैं।”

​सावधानी: अगर आपके बच्चे का वजन तेजी से बढ़ रहा है, तो इसे ‘खाते-पीते घर की निशानी’ समझकर नजरअंदाज न करें। यह फैटी लिवर की दस्तक हो सकती है।

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