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दिल्ली बनी ‘हीट आइलैंड’: 10 वर्षों में कई इलाकों में 6°C तक बढ़ गया जमीन का तापमान

दिल्ली बनी ‘हीट आइलैंड’: 10 वर्षों में कई इलाकों में 6°C तक बढ़ गया जमीन का तापमान

​नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है। हाल ही में आए एक शोध और सैटेलाइट डेटा विश्लेषण (Envirocatalyst) ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। दिल्ली के कई वार्डों में पिछले एक दशक (2015-2025/26) के दौरान लैंड सरफेस टेम्परेचर (LST) यानी जमीन के तापमान में 6 डिग्री सेल्सियस तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

​’हॉटस्पॉट्स’ की पहचान: कहाँ कितनी बढ़ी तपिश?

​सैटेलाइट डेटा के अनुसार, दिल्ली के कुछ खास इलाकों में कंक्रीट के बढ़ते जाल और घटती हरियाली के कारण तापमान में खतरनाक उछाल आया है:

​भाटी (दक्षिण दिल्ली): यहाँ औसत तापमान में सबसे ज्यादा 6.1°C की वृद्धि देखी गई।

​मदनपुर खादर और बदरपुर: इन क्षेत्रों में तापमान 5.9°C तक बढ़ गया है।

​संगम विहार और देवली: यहाँ भी तापमान में 5.4°C का इजाफा दर्ज किया गया है।

​पॉकेट ऑफ हीट: तेजी से बढ़ते निर्माण कार्यों के कारण दक्षिण और पूर्वी दिल्ली के इलाके ‘लोकल हीट पॉकेट’ में बदल गए हैं।

​क्यों तप रही है दिल्ली? (मुख्य कारण)

​विशेषज्ञों ने दिल्ली के इस ‘माइक्रो-क्लाइमेट’ बदलाव के लिए तीन प्रमुख कारणों को जिम्मेदार ठहराया है:

​अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट: कंक्रीट की इमारतें और डामर की सड़कें दिन भर गर्मी सोखती हैं और रात में उसे वातावरण में छोड़ती हैं, जिससे शहर ठंडा नहीं हो पाता।

​हरियाली का सिमटना: निर्माण कार्यों के कारण पेड़ों की कटाई और जल निकायों (Water bodies) का खत्म होना।

​बढ़ता कंक्रीट का जाल: खुले मैदानों की जगह पक्की संरचनाओं ने ले ली है, जिससे जमीन की गर्मी सोखने की क्षमता खत्म हो गई है।

​क्या है ‘फील लाइक’ टेम्परेचर (UTCI)?

​रिपोर्ट के मुताबिक, केवल थर्मामीटर का पारा ही नहीं बढ़ा है, बल्कि इंसानी शरीर द्वारा महसूस की जाने वाली गर्मी (Universal Thermal Climate Index) में भी 3.4°C की वृद्धि हुई है। इसका मतलब है कि दिल्ली वालों को वास्तविक तापमान से कहीं अधिक गर्मी और उमस का अहसास हो रहा है।

​कुछ इलाकों में मिली राहत

​जहाँ पूरी दिल्ली तप रही है, वहीं मुबारिकपुर और निठारी जैसे कुछ अपवाद भी हैं। इन वार्डों में बेहतर प्रबंधन या स्थानीय कारकों की वजह से तापमान में 0.4 से 0.6 डिग्री की मामूली गिरावट भी देखी गई है, जो यह दर्शाता है कि सही योजना से गर्मी कम की जा सकती है।

​डॉक्टर और पर्यावरणविदों की सलाह

​कूल रूफिंग: छतों पर सफेद पेंट या हीट-रिफ्लेक्टिव टाइल्स का उपयोग करें।

​माइक्रो-फॉरेस्ट: छोटे-छोटे पैच में सघन वनस्पति लगाएं।

​सतर्कता: दोपहर 12 से 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें और शरीर में पानी की कमी न होने दें।

​विशेषज्ञ की राय: “अगर दिल्ली के शहरी नियोजन में बदलाव नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में ‘हीट स्ट्रेस’ के कारण स्वास्थ्य और बिजली की खपत पर गंभीर संकट पैदा हो सकता है।”

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