केरल: भगवान कृष्ण और ‘चिकन मंडी’ का पोस्टर साझा करना पड़ा भारी, रेस्टोरेंट मालिक गिरफ्तार
यह खबर हाल ही में केरल के अलाप्पुझा जिले से सामने आई है, जहाँ एक रेस्टोरेंट के विज्ञापन को लेकर काफी विवाद खड़ा हो गया है।
केरल: भगवान कृष्ण और ‘चिकन मंडी’ का पोस्टर साझा करना पड़ा भारी, रेस्टोरेंट मालिक गिरफ्तार
अलाप्पुझा (चेर्थला): केरल के चेर्थला में ‘विशु’ त्योहार के अवसर पर एक विवादित विज्ञापन साझा करने के आरोप में पुलिस ने एक रेस्टोरेंट मालिक को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि रेस्टोरेंट के प्रचार के लिए भगवान कृष्ण के एक अपमानजनक चित्रण का उपयोग किया गया, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
क्या है पूरा मामला?
विवाद की शुरुआत तब हुई जब ‘मेहर मंडी एंड ग्रिल्स’ नामक रेस्टोरेंट ने विशु (मलयाली नववर्ष) के मौके पर एक डिजिटल ग्रीटिंग कार्ड जारी किया। इस पोस्टर में भगवान कृष्ण को ‘चिकन मंडी’ (एक प्रसिद्ध अरब मांसाहारी व्यंजन) के साथ दिखाया गया था।
चूँकि भगवान कृष्ण को हिंदू धर्म में शाकाहार और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है, इसलिए उन्हें मांस के साथ दिखाए जाने पर सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश फैल गया।
पुलिस कार्रवाई और FIR
घटना की गंभीरता को देखते हुए थन्नीमुक्कम निवासी वकील एम.वी. बीजू ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए:
रेस्टोरेंट मालिक अरशद को हिरासत में ले लिया है।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की उन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है जो सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने और धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुँचाने से संबंधित हैं।
दोषी पाए जाने पर इस मामले में एक साल तक की कैद का प्रावधान है।
रेस्टोरेंट प्रबंधन की सफाई
विवाद बढ़ता देख रेस्टोरेंट के पार्टनर शमीर ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो जारी कर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। प्रबंधन का कहना है कि:
यह पोस्टर जानबूझकर सार्वजनिक नहीं किया गया था।
एक निजी ग्रुप में हुई गलतफहमी के कारण यह गलती से साझा हो गया।
उनका उद्देश्य किसी भी समुदाय की आस्था को ठेस पहुँचाना नहीं था।
इलाके में तनाव बरकरार
माफीनामे के बावजूद स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) और अन्य हिंदू संगठनों ने इस कृत्य के विरोध में रेस्टोरेंट के बाहर प्रदर्शन करने का आह्वान किया है। एहतियात के तौर पर पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनी रहे।
नोट: कानून के विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर धार्मिक प्रतीकों का इस तरह का उपयोग अक्सर ‘हेट स्पीच’ या ‘धार्मिक विद्वेष’ की श्रेणी में आ जाता है, जिसके लिए सख्त कानूनी दंड तय हैं।
