नासिक TCS विवाद: कौन हैं निदा खान? जानिए FIR में HR एग्जीक्यूटिव पर लगे गंभीर आरोपों की पूरी सच्चाई
नई दिल्ली/नासिक: महाराष्ट्र के नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की BPO यूनिट में यौन उत्पीड़न, जबरन धर्मांतरण, मानसिक उत्पीड़न और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस कांड में निदा खान (Nida Khan) नाम की HR मैनेजर/एग्जीक्यूटिव मुख्य आरोपी के रूप में चर्चा में हैं। पुलिस की SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) उन्हें इस पूरे मामले की मास्टरमाइंड या लेडी कैप्टन बता रही है।
निदा खान कौन हैं?
निदा खान पुणे-बेस्ड HR मैनेजर/असिस्टेंट जनरल मैनेजर (HR) हैं, जो नासिक की TCS BPO यूनिट में काम करती थीं।
उम्र लगभग 30-32 साल बताई जा रही है।
उनकी जिम्मेदारी में कर्मचारियों की शिकायतों का निपटारा, खासकर POSH (Prevention of Sexual Harassment) एक्ट के तहत शिकायतों को हैंडल करना शामिल था।
SIT जांच में आरोप है कि उन्होंने हिंदू महिला कर्मचारियों की शिकायतों को नजरअंदाज किया, उन्हें “कॉर्पोरेट में ऐसी बातें नॉर्मल हैं” कहकर गैसलाइट किया और आरोपियों को संरक्षण दिया। कुछ रिपोर्ट्स में उन्हें “लेडी डी” (Lady D – दाऊद इब्राहिम का संकेत) भी कहा गया।
निदा खान शुरू में फरार बताई जा रही थीं, लेकिन बाद की रिपोर्ट्स के अनुसार उन्हें 10 अप्रैल 2026 के आसपास गिरफ्तार कर लिया गया। वे इस समय SIT की कस्टडी में हैं और जांच का केंद्र बिंदु बनी हुई हैं।
FIR में लगे मुख्य आरोप
नासिक पुलिस (देवलाली और मुंबई नाका थाने) में 9 FIR दर्ज की गई हैं (मार्च-अप्रैल 2026 में)। इनमें 8 महिलाओं की शिकायतें यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण को लेकर हैं, जबकि एक पुरुष कर्मचारी की शिकायत धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने को लेकर है।
निदा खान पर लगे प्रमुख आरोप:
शिकायतों को दबाना और अपराधों को बढ़ावा देना: महिला कर्मचारियों ने ईमेल और शिकायतों में यौन उत्पीड़न की बात बताई, लेकिन निदा खान ने कोई कार्रवाई नहीं की। उल्टा उन्हें चुप रहने की सलाह दी।
जबरन धर्मांतरण में सहयोग: हिंदू लड़कियों को खासतौर पर टारगेट करना, WhatsApp ग्रुप के जरिए उन्हें इस्लाम अपनाने के लिए दबाव डालना, हिंदू देवी-देवताओं (जैसे शिवलिंग) के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियां करना (“शिवलिंग पुरुष जननेंद्रिय का प्रतीक है, पूजा अश्लील है”)।
टीम लीडर्स के साथ मिलीभगत: मुस्लिम टीम लीडर्स (जैसे तौसीफ अत्तार, दानिश शेख आदि) के साथ मिलकर हिंदू महिलाओं को उनके अंडर में रखना, रिलेशनशिप बनाने के लिए मजबूर करना, ब्लैकमेल करना और यौन शोषण को बढ़ावा देना।
POSH एक्ट का उल्लंघन: इंटरनल कम्प्लेंट्स कमिटी के सदस्य होते हुए भी शिकायतों पर कार्रवाई न करना, जिससे अपराधियों का मनोबल बढ़ा।
अन्य: कुछ रिपोर्ट्स में जबरन बीफ खाने या धार्मिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए मजबूर करने का भी जिक्र है।
अन्य गिरफ्तार आरोपी (टीम लीडर्स): असिफ अंसारी, शफी शेख, शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन, तौसीफ अत्तार, दानिश शेख आदि। इन पर BNS धारा 69 (बलात्कार), 75 (यौन उत्पीड़न), 299 (धार्मिक भावनाएं भड़काना) आदि के तहत केस दर्ज हैं।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस ने 40 दिनों तक अंडरकवर ऑपरेशन चलाया (महिला पुलिसकर्मी कर्मचारियों के रूप में काम करती रहीं)।
आरोप है कि 2022 से चल रहे इस सिस्टमैटिक गैंग में हिंदू युवतियों (18-25 साल) को भर्ती कर उनके टीम लीडर्स के अधीन रखा जाता था।
यौन शोषण, स्टॉकिंग, इंटिमिडेशन और कन्वर्जन का दबाव आम था।
TCS ने आरोपी कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है और आंतरिक जांच शुरू की है। कंपनी ने जीरो टॉलरेंस की नीति दोहराई है।
SIT जांच जारी है, जिसमें भर्ती पैटर्न, फंडिंग और बड़े नेटवर्क की भी पड़ताल हो रही है।
यह मामला कॉर्पोरेट वर्कप्लेस में सुरक्षा, POSH एक्ट की प्रभावशीलता और धार्मिक सहिष्णुता पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। महाराष्ट्र सरकार और TCS दोनों ने सख्त एक्शन का भरोसा दिया है।
जांच अभी जारी है, इसलिए सभी आरोप साबित नहीं हुए हैं।
