नोएडा हिंसा पर बड़ा एक्शन: 300 से ज्यादा उपद्रवी गिरफ्तार, हिंसा भड़काने वाले ‘मास्टरमाइंड’ अब पुलिस के रडार पर
नई दिल्ली/नोएडा: नोएडा (गौतमबुद्ध नगर) में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर शुरू हुए श्रमिकों के प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया। पुलिस ने अब तक 300 से ज्यादा उपद्रवियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि 7 FIR दर्ज की गई हैं। हालात काबू में बताए जा रहे हैं, लेकिन भड़काने वालों की तलाश तेज कर दी गई है। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने कहा कि कुछ बाहरी तत्वों ने श्रमिकों को उकसाया और हिंसा भड़काई।
क्या हुआ था?
13 अप्रैल 2026 को फैक्ट्री वर्कर्स ने सैलरी बढ़ाने की मांग पर प्रदर्शन किया।
यह प्रदर्शन हिंसक हो गया — पथराव, आगजनी और तोड़फोड़ हुई। करीब 50-100 वाहनों को आग के हवाले किया गया, कई ऑफिस और सार्वजनिक संपत्ति क्षतिग्रस्त हुई।
नुकसान का अनुमान 3000 करोड़ रुपये तक बताया जा रहा है। 10 पुलिसकर्मी समेत 30 लोग घायल हुए।
मंगलवार को भी कुछ इलाकों (फेज-2, सेक्टर 121 आदि) में झड़पें हुईं, लेकिन पुलिस ने फ्लैग मार्च और भारी तैनाती से स्थिति संभाल ली।
पुलिस का एक्शन
300+ गिरफ्तारियां: ज्यादातर प्रिवेंटिव अरेस्ट के तहत। कई को न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
7 FIR: हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी के मामलों में।
व्हाट्सएप ग्रुप्स और सोशल मीडिया की जांच चल रही है। रातोंरात बने ग्रुप्स (जैसे ‘Workers Movement’) के जरिए QR कोड और मैसेज से हजारों श्रमिकों को जुटाया गया।
पुलिस का कहना है कि कई गिरफ्तार लोग असल श्रमिक नहीं थे, बल्कि भड़काने के लिए भेजे गए “बाहरी तत्व” थे। साइबर टीम फर्जी हैंडल और अफवाह फैलाने वालों पर नजर रखे हुए है।
भड़काने वालों पर फोकस
पुलिस और प्रशासन अब मुख्य रूप से श्रमिकों को उकसाने वालों पर ध्यान दे रहा है। कुछ मंत्री और अधिकारी इसे “सुनियोजित साजिश” बता रहे हैं। उत्तर प्रदेश श्रम मंत्री अनिल राजभर ने संभावित पाकिस्तान कनेक्शन का जिक्र किया और कहा कि एंटी-नेशनल ताकतें इसमें शामिल हो सकती हैं। जांच में STF और साइबर सेल सक्रिय हैं।
हालांकि, कई श्रमिकों की मांगें वास्तविक थीं — वेतन वृद्धि और महंगाई को लेकर। सरकार ने कुछ कंपनियों में ₹3000 तक की वेतन बढ़ोतरी को मंजूरी दी है, लेकिन हिंसा करने वालों पर सख्ती बरती जा रही है।
मौजूदा स्थिति
नोएडा में भारी पुलिस फोर्स तैनात — PAC, RAF और मजिस्ट्रेट सक्रिय।
ट्रैफिक प्रभावित इलाकों में सामान्य हो रहा है, लेकिन संवेदनशील जगहों पर पिकेटिंग जारी।
आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।
यह घटना श्रमिकों की समस्याओं और साथ ही बाहरी ताकतों द्वारा माहौल बिगाड़ने की कोशिशों को उजागर करती है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि कानून व्यवस्था बनाए रखते हुए वैध मांगों पर विचार किया जाएगा।
क्या लगता है आपको — क्या यह सिर्फ श्रमिक आंदोलन था या इसमें बड़ी साजिश शामिल थी? कमेंट में अपनी राय जरूर बताएं!
