पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान वार्ता क्यों फेल हुई? जेडी वेंस ने बताई असली वजह
पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान वार्ता क्यों फेल हुई? जेडी वेंस ने बताई असली वजह
नई दिल्ली: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटे चली मैराथन शांति वार्ता बिना किसी समझौते के खत्म हो गई। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने वार्ता के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलकर असली वजह बताई। उन्होंने कहा कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल के पास डील फाइनल करने का अधिकार ही नहीं था। उन्हें तेहरान लौटकर सुप्रीम लीडर या किसी उच्च अधिकारी से मंजूरी लेनी पड़ती।
वेंस ने कहा, “हमने पाकिस्तान में अच्छी प्रगति की, लेकिन हम यह समझ गए कि वहां मौजूद टीम डील कट नहीं कर पा रही थी। उन्हें तेहरान जाकर (सुप्रीम लीडर या किसी और से) मंजूरी लेनी पड़ती। यही असली वजह है कि हम पाकिस्तान छोड़कर वापस लौट आए।”400640
मुख्य वजहें क्या बताईं जेडी वेंस ने?
परमाणु हथियार पर अड़ी ईरान: अमेरिका की मुख्य मांग थी कि ईरान स्पष्ट रूप से वचन दे कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और न ही ऐसे टूल्स हासिल करेगा जिनसे जल्दी परमाणु हथियार बना सके। वेंस ने कहा, “ईरान ने हमारी शर्तें मानने से इनकार कर दिया।”65a438
ईरानी टीम बिना अथॉरिटी के: वार्ता में ईरान की तरफ से विदेश मंत्री अब्बास अरागची और संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ मौजूद थे, लेकिन वेंस के अनुसार उनके पास फाइनल डिसीजन लेने की पावर नहीं थी। उन्हें तेहरान से हरी झंडी का इंतजार करना पड़ता।
गोलपोस्ट शिफ्ट करने की कोशिश: वेंस ने आरोप लगाया कि ईरानी पक्ष बातचीत के दौरान शर्तों को बदलने (move the goalposts) की कोशिश कर रहा था, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर।
वेंस ने यह भी कहा कि अमेरिका “नेक नीयत” से वार्ता में शामिल हुआ था और काफी लचीला रवैया अपनाया, लेकिन कोई हेडवे नहीं बना। उन्होंने जोड़ा, “यह बुरी खबर है, लेकिन ईरान के लिए अमेरिका से ज्यादा बुरी खबर है।”503293
क्या है पूरा मामला?
ये वार्ता मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष (US-Israel vs Iran) को खत्म करने और दो हफ्ते के सीजफायर को स्थायी बनाने के लिए हुई थी।
पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने दोनों पक्षों की मेजबानी की, जिसकी जेडी वेंस ने तारीफ भी की।
वार्ता 11-12 अप्रैल 2026 को हुई। 21 घंटे की चर्चा के बाद वेंस ने कहा कि अमेरिका अपना “फाइनल और बेस्ट ऑफर” दे चुका है, अब बॉल ईरान के कोर्ट में है।
ईरान की तरफ से कहा गया कि अमेरिका की मांगें “अनुचित” थीं और पहली बैठक में डील की उम्मीद नहीं थी। दोनों पक्षों के बीच अब भी मैसेज का आदान-प्रदान जारी है।
आगे क्या?
वार्ता के फेल होने से दो हफ्ते का सीजफायर खतरे में पड़ गया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (तेल परिवहन का अहम रास्ता) को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही सख्त चेतावनी दी थी।
जेडी वेंस के बयान से साफ हुआ कि समस्या सिर्फ शर्तों की नहीं, बल्कि ईरान की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया की भी है। पाकिस्तान की मध्यस्थता को दोनों तरफ से सराहा गया, लेकिन नतीजा अभी नहीं निकला।
क्या लगता है आपको — क्या ईरान आगे शर्तें मानेगा या तनाव बढ़ेगा? कमेंट में बताएं!
