ट्रंप को तगड़ा झटका: होर्मुज स्ट्रेट पर NATO ने खींचे हाथ, साथ देने की अपील पर मिला दो टूक जवाब— ‘NO’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सुरक्षित करने और खुला रखने के लिए NATO सहयोगियों से मदद मांगने पर बड़ा झटका लगा है। यूरोपीय NATO देशों ने साफ मना कर दिया — ‘Nein’, ‘Non’ और ‘No’। ट्रंप अब नाराजगी जता रहे हैं और कह रहे हैं कि अमेरिका को किसी की मदद की जरूरत नहीं है, लेकिन इस रिजेक्शन को NATO के भविष्य के लिए “बहुत बुरा” बता चुके हैं।
ट्रंप ने मार्च 2026 में NATO और अन्य सहयोगी देशों (जापान, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया आदि) से अपील की थी कि वे होर्मुज में नौसैनिक सहायता दें, ताकि ईरान द्वारा प्रभावित शिपिंग रूट को फिर से खोला जा सके। ईरान ने अमेरिका-इजराइल संघर्ष के जवाब में होर्मुज को ज्यादातर शिपिंग के लिए बंद कर दिया था, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई और कीमतें $100 प्रति बैरल के पार चली गईं।38c4a1
ट्रंप का बयान और NATO का जवाब
ट्रंप ने फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में चेतावनी दी थी कि अगर NATO मदद नहीं करता तो गठबंधन का भविष्य “बहुत बुरा” होगा। उन्होंने कहा, “हम NATO के लिए हमेशा वहां रहते हैं… यह सिर्फ स्ट्रेट को खुला रखने का छोटा सा काम है।” लेकिन जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन समेत यूरोपीय देशों ने साफ कहा — “यह हमारा युद्ध नहीं है” और “NATO का मिशन नहीं बन सकता”।
जर्मनी के डिफेंस मिनिस्टर बोले: “यह यूरोप का युद्ध नहीं है।”
ब्रिटेन के पीएम कीस्टार ने कहा कि NATO मिशन नहीं, बल्कि पार्टनर्स का अलग गठबंधन हो सकता है, लेकिन वो भी सीमित।
स्पेन समेत कई देशों ने कहा कि होर्मुज NATO के दायरे से बाहर है।
ट्रंप ने इसे “foolish mistake” बताया और कहा कि अमेरिका ने NATO की बहुत मदद की, लेकिन अब जब बारी हमारी है तो सपोर्ट नहीं मिल रहा। बाद में उन्होंने टोन बदली और बोला — “हमको किसी की मदद की जरूरत नहीं है।”7ab9b1
क्यों बढ़ी ट्रंप की टेंशन?
होर्मुज से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है। ईरान के बंद करने से ग्लोबल एनर्जी क्राइसिस गहराया।
अमेरिका ने अकेले नेवल ऑपरेशन शुरू किया, लेकिन सहयोगी नहीं चाहते कि वो US-इजराइल vs ईरान युद्ध में और उलझें।
जापान और ऑस्ट्रेलिया ने भी warships भेजने से इनकार कर दिया। चीन से भी कोई सकारात्मक जवाब नहीं आया।
अप्रैल 2026 में पाकिस्तान में JD वेंस की ईरान के साथ 21 घंटे की बातचीत फेल होने के बाद ट्रंप ने होर्मुज पर ब्लॉकेड का ऐलान कर दिया (ईरानी पोर्ट्स से आने-जाने वाले जहाजों पर)। NATO फिर भी अलग रहा।
ट्रंप ने NATO को “loyalty test” बताया था, लेकिन ज्यादातर सहयोगी इससे बच गए। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि यह ट्रंप की “America First” पॉलिसी और पुरानी NATO आलोचना का नतीजा है।
आगे क्या?
अभी अमेरिका अकेले ही होर्मुज में नेवी ऑपरेशन चला रहा है। ईरान के साथ शांति वार्ता फेल होने के बाद तनाव जारी है। ट्रंप ने कहा है कि अगर जरूरी हुआ तो और एस्केलेशन हो सकता है, लेकिन NATO का “NO” उनके लिए बड़ा सिरदर्द बन गया है।
यह घटनाक्रम NATO के अंदर दरार को भी उजागर कर रहा है। क्या ट्रंप NATO से दूरी बढ़ाएंगे या स्थिति संभालेंगे? फिलहाल ट्रंप की टेंशन साफ दिख रही है।
क्या लगता है आपको — NATO का यह रुख सही है या ट्रंप की मांग जायज? कमेंट में बताएं!
