दुनिया के ‘गोल्ड रिजर्व’ में कौन है नंबर 1? जानें क्यों भारत, चीन और रूस के केंद्रीय बैंक खाली कर रहे हैं तिजोरियां!
विश्व में सबसे ज्यादा गोल्ड रिजर्व वाले देश (2026 के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार):
संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के पास दुनिया का सबसे बड़ा आधिकारिक गोल्ड रिजर्व है, जो लगभग 8,133 टन है। यह जर्मनी (लगभग 3,350 टन) और इटली (लगभग 2,452 टन) के संयुक्त रिजर्व से भी ज्यादा है। टॉप 5 में शामिल अन्य देश हैं:
जर्मनी (~3,350 टन)
इटली (~2,452 टन)
फ्रांस (~2,437 टन)
रूस (~2,327-2,336 टन)
चीन के पास आधिकारिक रूप से लगभग 2,306-2,308 टन गोल्ड है, जबकि भारत (RBI) के पास करीब 880 टन है। ये आंकड़े IMF, World Gold Council और विभिन्न रिपोर्ट्स पर आधारित हैं, और USA का रिजर्व दशकों से स्थिर बना हुआ है।557676
चीन, भारत और रूस क्यों खरीद रहे हैं जमकर गोल्ड?
पिछले कुछ वर्षों में उभरते बाजारों (खासकर BRICS देशों) के सेंट्रल बैंक गोल्ड की भारी खरीदारी कर रहे हैं। 2022 के बाद से सालाना सेंट्रल बैंक खरीदारी 1,000 टन से ज्यादा हो गई है, जो पहले 500 टन के आसपास थी। मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
डॉलर से दूरी (De-dollarization): रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका और यूरोप ने रूसी एसेट्स को फ्रीज कर दिया। इससे कई देशों को डर लगा कि उनका डॉलर-आधारित रिजर्व सैंक्शन्स का शिकार हो सकता है। इसलिए चीन, रूस, भारत जैसे देश अपनी फॉरेन रिजर्व को डॉलर से हटाकर गोल्ड में डाइवर्सिफाई कर रहे हैं। गोल्ड कोई भी देश फ्रीज नहीं कर सकता और यह न्यूट्रल एसेट माना जाता है।f23cae
जियोपॉलिटिकल रिस्क और सैंक्शन्स से बचाव: बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (ट्रेड वॉर, युद्ध, अनिश्चितता) में गोल्ड सुरक्षित आश्रय (safe-haven) की तरह काम करता है। चीन की पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBOC) लगातार कई महीनों से गोल्ड खरीद रही है (2025-26 में 14-16 महीनों की स्ट्रिक रिपोर्टेड है)। रूस पहले से ही बड़ा होल्डर है और भारत (RBI) भी लगातार अपनी होल्डिंग्स बढ़ा रहा है।e63f1d
इन्फ्लेशन और करेंसी स्टेबिलिटी: दुनिया भर में महंगाई और करेंसी वोलेटिलिटी के बीच गोल्ड लंबे समय का स्टोर ऑफ वैल्यू है। BRICS देश डॉलर की बजाय लोकल करेंसी ट्रेड और गोल्ड-बेस्ड सिस्टम की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे गोल्ड की डिमांड बढ़ रही है।
स्ट्रैटेजिक और इकोनॉमिक कारण: चीन घरेलू डिमांड (ज्वेलरी + इन्वेस्टमेंट) के साथ-साथ रिजर्व डाइवर्सिफिकेशन कर रहा है। भारत में सांस्कृतिक डिमांड के अलावा RBI विदेशी मुद्रा रिजर्व को मजबूत बनाने के लिए गोल्ड बढ़ा रहा है। रूस भी सैंक्शन्स के बावजूद गोल्ड को स्ट्रैटेजिक एसेट मानता है। 2025 में गोल्ड की कीमतों में भारी उछाल (65% तक) आया, फिर भी सेंट्रल बैंक खरीदारी जारी रही।b6f02e
निष्कर्ष:
USA अभी भी सबसे आगे है, लेकिन चीन, भारत और रूस जैसे देश तेजी से गोल्ड जमा कर रहे हैं। यह ट्रेंड वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में बदलाव का संकेत है, जहां गोल्ड फिर से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। 2026 में भी सेंट्रल बैंक डिमांड मजबूत रहने की उम्मीद है, जो गोल्ड की कीमतों को सपोर्ट करेगी।
