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इतिहास रचकर लौटे ‘चंद्रयात्री’: 10 दिनों के सफर के बाद प्रशांत महासागर में सुरक्षित उतरा नासा का ओरियन यान

इतिहास रचकर लौटे ‘चंद्रयात्री’: 10 दिनों के सफर के बाद प्रशांत महासागर में सुरक्षित उतरा नासा का ओरियन यान

​वॉशिंगटन/सैन डिएगो: 50 से अधिक वर्षों के लंबे इंतजार के बाद, इंसान एक बार फिर चांद की दहलीज को छूकर सुरक्षित धरती पर लौट आया है। नासा (NASA) का आर्टेमिस-2 (Artemis II) मिशन शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026 को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। चार अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर जा रहा ओरियन कैप्सूल भारतीय समयानुसार शनिवार सुबह प्रशांत महासागर में सैन डिएगो के तट के पास उतरा।

​मिशन की मुख्य झलकियां

​10 दिनों की यात्रा: यह मिशन करीब 10 दिनों का था, जिसमें अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा के चारों ओर चक्कर लगाया और अंतरिक्ष के गहरे रहस्यों का अध्ययन किया।

​ऐतिहासिक स्प्लैशडाउन: ओरियन कैप्सूल ने पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते समय लगभग 40,000 किमी/घंटा की रफ्तार पकड़ी थी, जिसे पैराशूट के जरिए धीमा कर सुरक्षित रूप से ‘स्प्लैशडाउन’ (समुद्र में लैंडिंग) कराया गया।

​रिकॉर्ड तोड़ दूरी: इस यात्रा के दौरान चालक दल ने पृथ्वी से लगभग 4 लाख किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की, जो 1970 के अपोलो मिशन के बाद इंसानों द्वारा तय की गई सबसे लंबी दूरी है।

​कौन थे ये चार जांबाज?

​इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल थे जिन्होंने इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज कराया:

​रीड वाइसमैन (कमांडर)

​विक्टर ग्लोवर (पायलट) – चांद के करीब जाने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति।

​क्रिस्टीना कोच (मिशन स्पेशलिस्ट) – चांद के करीब जाने वाली पहली महिला।

​जेरेमी हैनसन (मिशन स्पेशलिस्ट) – कनाडाई अंतरिक्ष यात्री।

​अगला पड़ाव: चांद पर कदम

​आर्टेमिस-2 की सफलता ने अब आर्टेमिस-3 का रास्ता साफ कर दिया है। इस सफल परीक्षण के बाद अब नासा अगले चरण में इंसानों को सीधे चंद्रमा की सतह पर उतारने की तैयारी करेगा।

​अमेरिकी नौसेना और नासा की रिकवरी टीमों ने समुद्र से कैप्सूल और यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। नासा प्रमुख ने इसे “मानवता के लिए एक नई शुरुआत” करार दिया है।

​यह मिशन न केवल तकनीक की जीत है, बल्कि भविष्य में मंगल ग्रह (Mars) तक जाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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