फ्रांस का बड़ा फैसला: सरकारी दफ्तरों से होगी Microsoft Windows की विदाई, अब स्वदेशी और ‘लिनक्स’ सॉफ्टवेयर का होगा बोलबाला
फ्रांस का बड़ा फैसला: सरकारी दफ्तरों से होगी Microsoft Windows की विदाई, अब स्वदेशी और ‘लिनक्स’ सॉफ्टवेयर का होगा बोलबाला
पेरिस: तकनीकी दुनिया में अमेरिका के वर्चस्व को चुनौती देते हुए फ्रांस ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। फ्रांसीसी सरकार ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि वह अपने सभी सरकारी मंत्रालयों और विभागों में माइक्रोसॉफ्ट विंडोज (Microsoft Windows) का उपयोग बंद करेगी। इसकी जगह अब ओपन-सोर्स ऑपरेटिंग सिस्टम लिनक्स (Linux) और स्वदेशी तकनीकों को अपनाया जाएगा।
क्यों लिया गया यह कड़ा फैसला?
फ्रांस की ‘इंटरमिनिस्ट्रियल डिजिटल डायरेक्टोरेट’ (DINUM) के अनुसार, इस फैसले के पीछे तीन मुख्य कारण हैं:
डिजिटल संप्रभुता: फ्रांस अपनी रणनीतिक जानकारी और डेटा के लिए अमेरिकी कंपनियों पर निर्भरता खत्म करना चाहता है। सरकार का मानना है कि विदेशी सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल से राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा की गोपनीयता को खतरा हो सकता है।
लागत में कटौती: विंडोज के महंगे लाइसेंस और सब्सक्रिप्शन फीस को हटाकर फ्रांस हर साल करोड़ों यूरो की बचत करेगा। अनुमान है कि केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए स्वदेशी टूल अपनाने से ही लाखों यूरो बचेंगे।
अमेरिकी कानूनों का डर: अमेरिकी ‘क्लाउड एक्ट’ जैसे कानून वहां की सरकार को विदेशी डेटा तक पहुंच की शक्ति देते हैं। फ्रांस अपने संवेदनशील डेटा को इन बाहरी जोखिमों से सुरक्षित रखना चाहता है।
सिर्फ विंडोज ही नहीं, इन पर भी गिरी गाज
फ्रांस ने केवल ऑपरेटिंग सिस्टम ही नहीं, बल्कि अन्य अमेरिकी ऐप्स को भी बदलने की योजना तैयार की है:
Zoom और Teams पर पाबंदी: करीब 25 लाख सिविल सेवकों को निर्देश दिया गया है कि वे वीडियो कॉलिंग के लिए ज़ूम या माइक्रोसॉफ्ट टीम्स की जगह फ्रांस में बने ‘Visio’ प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करें।
क्लाउड और AI: सरकार ने मंत्रालयों को आदेश दिया है कि वे साल 2026 के अंत तक क्लाउड स्टोरेज, एंटी-वायरस और AI टूल्स के लिए यूरोपीय विकल्पों की तलाश पूरी करें।
2026 तक पूरी होगी प्रक्रिया
फ्रांस सरकार ने सभी मंत्रालयों को अक्टूबर 2026 तक अपनी विस्तृत योजना पेश करने को कहा है कि वे कैसे विंडोज से लिनक्स पर माइग्रेट करेंगे। इस अभियान का नेतृत्व DINUM खुद कर रहा है, जिसने अपने 250 से अधिक कर्मचारियों के सिस्टम को पहले ही लिनक्स पर शिफ्ट करना शुरू कर दिया है।
सरकारी बयान: “हम अब यह स्वीकार नहीं कर सकते कि हमारा डेटा, हमारा बुनियादी ढांचा और हमारे रणनीतिक फैसले उन समाधानों पर निर्भर हों जिनके नियमों और कीमतों पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है।” – डेविड एमिएल (फ्रांसीसी मंत्री)
प्रभाव: फ्रांस के इस कदम से यूरोप के अन्य देशों (जैसे जर्मनी और ऑस्ट्रिया) में भी इसी तरह की मांग तेज हो गई है। जानकारों का मानना है कि यह ‘सिलिकॉन वैली’ की दिग्गज कंपनियों के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है।
