टेक-ऑटो

पेट्रोल, बैटरी या हाइड्रोजन: भविष्य में कारें कैसे चलेंगी? ईंधन क्रांति का दौर शुरू

पेट्रोल, बैटरी या हाइड्रोजन: भविष्य में कारें कैसे चलेंगी? ईंधन क्रांति का दौर शुरू

नई दिल्ली, 23 जुलाई 2026 – ऑटोमोबाइल उद्योग में तेजी से बदलाव हो रहा है। पेट्रोल और डीजल वाली पुरानी कारों के साथ-साथ बैटरी से चलने वाली इलेक्ट्रिक वाहन (EV) तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं, लेकिन अब रिन्यूएबल फ्यूल, ई-फ्यूल, हाइड्रोजन और हाइब्रिड टेक्नोलॉजी भी भविष्य के ईंधन के रूप में उभर रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, 2040 तक बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों (BEV) की बाजार हिस्सेदारी 70% से ज्यादा हो सकती है, लेकिन मौजूदा बेड़े को बचाने और चुनौतियों से निपटने के लिए मल्टी-फ्यूल अप्रोच अपनाया जा रहा है।

इलेक्ट्रिक वाहन: तेज रफ्तार से आगे

EV सेक्टर में बैटरी की कीमतों में 90% से ज्यादा की गिरावट आई है, जिससे नई कारें सस्ती और लंबी रेंज वाली हो रही हैं। ग्लोबल EV सेल्स 2026 में नए वाहनों का करीब 27% हिस्सा ले सकती हैं। भारत में भी EV दो और तीन पहिया वाहनों की बिक्री बढ़ रही है।

हालांकि, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रिड लोड और रॉ मटेरियल (जैसे लिथियम) की कमी चुनौती बनी हुई है। इसी वजह से कई कंपनियां हाइब्रिड वाहनों पर भी जोर दे रही हैं।

पेट्रोल का नया रूप: रिन्यूएबल और ई-फ्यूल

BMW और Toyota जैसे ब्रांड Repsol के Nexa 95 जैसे 100% रिन्यूएबल गैसोलीन का परीक्षण कर रहे हैं। यह मौजूदा इंजन और पेट्रोल पंप में बिना किसी बदलाव के इस्तेमाल हो सकता है और उत्सर्जन काफी कम करता है। स्पेन में चल रहे पायलट प्रोजेक्ट में पुरानी और नई दोनों कारों पर टेस्ट हो रहा है।

ई-फ्यूल (सिंथेटिक फ्यूल) भी चर्चा में हैं, जो हरे हाइड्रोजन और CO₂ से बनते हैं। ये मौजूदा ICE वाहनों को कार्बन न्यूट्रल बना सकते हैं, हालांकि उत्पादन महंगा है।

हाइड्रोजन: भारी वाहनों और ट्रेनों का भविष्य

हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी लंबी दूरी और तेज रिफ्यूलिंग के लिए उपयुक्त है। भारत ने हाल ही में अपना पहला हाइड्रोजन ट्रेन लॉन्च किया है, जो जीरो एमिशन के साथ चल रही है। ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत पायलट प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं।

कारों में हाइड्रोजन अभी महंगा है, लेकिन 2030 तक कीमत घटने की उम्मीद है।

भारत का परिदृश्य: E20, हाइब्रिड और हाइड्रोजन

भारत में E20 (20% इथेनॉल ब्लेंड) पेट्रोल अनिवार्य हो चुका है, जो आयात कम करने और किसानों को फायदा पहुंचाने में मदद कर रहा है। हाइब्रिड कारें CAFE नॉर्म्स को पूरा करने के लिए बढ़ रही हैं। मारुति, ह्युंडई, टाटा जैसी कंपनियां EV और हाइब्रिड दोनों पर फोकस कर रही हैं।

विशेषज्ञों की राय

भविष्य मल्टी-पाथ का होगा:

शहरों और हल्की गाड़ियों में EV प्रमुख।

लंबी दूरी और भारी वाहनों में हाइड्रोजन और बायोफ्यूल।

मौजूदा बेड़े के लिए रिन्यूएबल फ्यूल।

Roland Berger जैसी रिपोर्ट्स के अनुसार, EV 2040 तक ग्लोबल मार्केट पर हावी रहेंगे, लेकिन अन्य विकल्प भी अपना स्थान बनाएंगे।

निष्कर्ष: आपकी अगली कार पेट्रोल, बैटरी, हाइब्रिड या हाइड्रोजन में से किसी भी रूप में चल सकती है। जो तय है, वह है – सस्टेनेबल और क्लीन मोबिलिटी की ओर बढ़ता कदम। ऑटो इंडस्ट्री और सरकारें इस ट्रांजिशन को तेज करने के लिए काम कर रही हैं।

(स्रोत: विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स और हालिया समाचार)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *