झारखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का हार्ट अटैक से निधन; गिरिडीह आवास पर बिगड़ी थी तबीयत
झारखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का हार्ट अटैक से निधन; गिरिडीह आवास पर बिगड़ी थी तबीयत
रांची/गिरिडीह: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के वरिष्ठ नेता और राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का बीती रात दिल का दौरा (Heart Attack) पड़ने से आकस्मिक निधन हो गया। वे गिरिडीह स्थित अपने आवास पर थे, जब सोने के दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिजनों और समर्थकों द्वारा उन्हें तत्काल गिरिडीह के ‘मरसी अस्पताल’ ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों के भरसक प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
उनके अचानक निधन से झारखंड के राजनीतिक गलियारों और झामुमो कार्यकर्ताओं में शोक की लहर दौड़ गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित तमाम दलीय नेताओं ने उनके असमय निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
1. गिरिडीह अस्पताल पहुंचा प्रशासनिक अमला
तत्काल अस्पताल भर्ती: देर रात तबीयत बिगड़ने के बाद मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू को तुरंत निजी अस्पताल पहुँचाया गया।
रांची रेफर करने का समय नहीं मिला: स्थिति अत्यधिक गंभीर होने के कारण उन्हें बेहतर इलाज के लिए रांची एयरलिफ्ट या शिफ्ट करने का अवसर भी नहीं मिल सका। खबर मिलते ही गिरिडीह का पूरा प्रशासनिक अमला और भारी संख्या में समर्थक अस्पताल पहुँच गए थे।
2. सुदिव्य कुमार सोनू का राजनीतिक सफर और कद
दो बार के विधायक: सुदिव्य कुमार सोनू पहली बार वर्ष 2019 में गिरिडीह सदर विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे। इसके बाद 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने लगातार दूसरी बार जीत हासिल की।
महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो: हेमंत सोरेन मंत्रिमंडल में वे कैबिनेट मंत्री बनाए गए थे। उनके पास पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य, नगर विकास तथा उच्च एवं तकनीकी शिक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण विभागों का प्रभार था।
गिरिडीह से पहले मंत्री: करीब दो दशक के लंबे इंतजार के बाद गिरिडीह विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्य सरकार में मंत्री बनने वाले वे पहले झामुमो नेता थे।
3. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बेहद करीबी
सरकार का मजबूत चेहरा: सुदिव्य कुमार सोनू की गिनती मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सबसे रणनीतिक और करीबी सहयोगियों में होती थी।
छात्र व युवा मुद्दों पर सक्रियता: हाल के महीनों में झारखंड में छात्र आंदोलनों और प्रतियोगी परीक्षाओं/भर्तियों से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर वे सरकार का पक्ष मजबूती से रखते आए थे।
