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ट्रंप का दावा: ‘ईरान के नए राष्ट्रपति ने सीजफायर की गुजारिश की’, लेकिन जंग रोकने की शर्त साफ — हॉर्मुज जलडमरूमध्य खुलना चाहिए

ट्रंप का दावा: ‘ईरान के नए राष्ट्रपति ने सीजफायर की गुजारिश की’, लेकिन जंग रोकने की शर्त साफ — हॉर्मुज जलडमरूमध्य खुलना चाहिए

अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि ईरान के नए राष्ट्रपति (जिन्हें उन्होंने “much less radicalized and far more intelligent” बताया) ने अमेरिका से सीजफायर (युद्धविराम) की मांग की है। ट्रंप ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयानों में यह बात दोहराई।

ट्रंप का कहना है कि ईरान अब युद्ध जारी नहीं रखना चाहता और समझौते के लिए तैयार है। उन्होंने यहां तक कहा कि अमेरिकी सैन्य अभियान 2-3 सप्ताह में समाप्त हो सकता है — चाहे डील हो या न हो।

लेकिन ट्रंप ने जंग रोकने की साफ शर्त बता दी

ट्रंप ने साफ कर दिया कि सीजफायर पर विचार तभी होगा, जब ईरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पूरी तरह खोल दे, उसे मुक्त और सुरक्षित बनाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह नहीं हुआ तो अमेरिका ईरान को “obliterate” कर देगा — यानी उसके ऊर्जा संयंत्रों, तेल कुओं और खार्ग द्वीप को नष्ट कर सकता है।

ट्रंप ने कहा, “हम हॉर्मुज को खुला, मुक्त और साफ देखना चाहते हैं। तब तक हम ईरान को पत्थर के युग में धकेलने का काम जारी रखेंगे।”

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन का रुख

ईरान के वर्तमान राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा है कि उनके देश में युद्ध समाप्त करने की “जरूरी इच्छाशक्ति” है, लेकिन इसके लिए कुछ महत्वपूर्ण शर्तें पूरी होनी चाहिए। इनमें मुख्य हैं:

आक्रामकता का पूर्ण अंत और भविष्य में दोबारा हमले न होने की गारंटी

युद्ध के नुकसान की भरपाई (war reparations)

हॉर्मुज पर ईरान की संप्रभुता का सम्मान

पूरे क्षेत्र में सभी मोर्चों पर लड़ाई का अंत

ईरान ने अमेरिका के 15-पॉइंट प्रस्ताव को खारिज कर दिया था और इसके बजाय अपनी 5 शर्तों वाला काउंटर-प्रस्ताव दिया था। तेहरान का रुख है कि युद्ध तब खत्म होगा, जब ईरान खुद तय करेगा और अपनी शर्तें मानी जाएंगी।

मौजूदा स्थिति

हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे तेल की कीमतें बढ़ी हैं।

ट्रंप ने कुछ दिनों के लिए ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले टाल दिए थे, लेकिन अब समयसीमा बढ़ा दी गई है।

दोनों तरफ से कड़ी बयानबाजी जारी है, लेकिन पीछे-पीछे कुछ देशों (पाकिस्तान, यूरोपीय आदि) के माध्यम से अप्रत्यक्ष बातचीत भी चल रही है।

ट्रंप की रणनीति “मजबूती से बातचीत” वाली लग रही है — दबाव बनाए रखते हुए डील की संभावना जताना। वहीं ईरान अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की गारंटी के बिना झुकने को तैयार नहीं दिख रहा।

युद्ध अब एक महीने से ज्यादा का हो चुका है और मध्य पूर्व की स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। आगे क्या होता है, यह अगले कुछ दिनों-हफ्तों में साफ हो सकता है।

(यह रिपोर्ट ट्रंप के हालिया बयानों, ईरानी मीडिया और अंतरराष्ट्रीय समाचार स्रोतों पर आधारित है। स्थिति तेजी से बदल रही है।)

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