ईरान ने छह बांग्लादेशी जहाजों को होर्मुज में दी हरी झंडी, लेकिन पहले जमकर चेतावनी क्यों दी?
ईरान ने छह बांग्लादेशी जहाजों को होर्मुज में दी हरी झंडी, लेकिन पहले जमकर चेतावनी क्यों दी?
मध्य पूर्व में चल रहे अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान युद्ध के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह तनाव का केंद्र बना हुआ है। ईरान ने इस महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य को अपने “शत्रु” देशों और उनके सहयोगियों के जहाजों के लिए बंद कर रखा है, जबकि कुछ “मित्र” या “गैर-शत्रु” देशों को समन्वय के बाद सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी जा रही है।
इसी क्रम में ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने हाल ही में (1 अप्रैल 2026 को) छह बांग्लादेशी ईंधन वाहक जहाजों को होर्मुज से सुरक्षित गुजरने की मंजूरी दे दी। ईरान के ढाका स्थित राजदूत जलिल रहीमी जहांाबादी ने इसकी पुष्टि की। ये जहाज एलएनजी और क्रूड ऑयल ले जा रहे थे और युद्ध शुरू होने के बाद फंस गए थे।
ईरान ने “हरी झंडी” क्यों दी?
ईरान ने बांग्लादेश को अपनी “मित्र राष्ट्रों” की सूची में शामिल किया है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने राज्य टीवी पर कहा कि चीन, रूस, भारत, पाकिस्तान, इराक और बांग्लादेश जैसे देशों के जहाजों को समन्वय के बाद पास करने की अनुमति है।
बांग्लादेश ने ईरान के साथ कूटनीतिक संपर्क बनाए रखा, जहाजों की सूची सौंपी और क्षेत्रीय स्थिरता की अपील की। इसके बदले ईरान ने राहत दी, जिससे बांग्लादेश के ईंधन आयात पर पड़ने वाले संकट को कुछ हद तक टाला जा सका।
लेकिन पहले जमकर चेतावनी और “सुना” क्यों दिया?
ईरान ने होर्मुज को पूरी तरह युद्ध क्षेत्र घोषित कर दिया है। IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) ने साफ चेतावनी दी कि:
अमेरिका, इजरायल और उनके सहयोगी देशों के जहाजों को बिल्कुल नहीं गुजरने दिया जाएगा।
बिना ईरानी अधिकारियों से पूर्व समन्वय के कोई भी जहाज प्रवेश करे तो उसे “कठोर जवाब” (harsh response) मिलेगा — यानी रोका, वापस लौटाया या हमला किया जा सकता है।
कुछ देशों (जैसे पाकिस्तान के कुछ कंटेनर जहाजों) को पहले वापस लौटने पर मजबूर किया गया जब वे बिना अनुमति या गलत कॉरिडोर में घुसे।
बांग्लादेशी जहाज भी शुरू में फंस गए क्योंकि ईरान ने सख्त नियम लागू किए थे — हर जहाज को पहले सूचना देनी पड़ती है और मंजूरी लेनी पड़ती है। ईरान ने बिना समन्वय वाले जहाजों को चेतावनी देकर रोका, ताकि अपनी संप्रभुता और नियंत्रण साबित कर सके। साथ ही, कुछ रिपोर्ट्स में ईरान संसद में प्रति जहाज 20 लाख डॉलर ट्रांजिट फीस लगाने का विधेयक तैयार कर रहा है, जो अपनी स्थिति मजबूत करने का हिस्सा है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह घटना?
बांग्लादेश के लिए राहत: देश ईंधन आयात पर निर्भर है। देरी से कीमतें बढ़ने और सप्लाई चेन प्रभावित होने का खतरा था।
ईरान की रणनीति: शत्रु को दबाव, मित्रों को रियायत — इससे ईरान अपनी कूटनीतिक और सैन्य स्थिति दिखा रहा है।
वैश्विक असर: होर्मुज से दुनिया का 20% से ज्यादा तेल गुजरता है। ऐसे फैसलों से तेल की कीमतें और शिपिंग प्रभावित हो रही हैं।
फिलहाल छह जहाजों को पास करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, लेकिन पूरा क्षेत्र अभी भी अस्थिर है। ईरान बार-बार दोहरा रहा है कि होर्मुज उसके नियंत्रण में है और नियम उसके अनुसार ही चलेंगे।
(यह जानकारी हालिया समाचार रिपोर्टों, ईरानी राजदूत के बयान और बांग्लादेशी मीडिया पर आधारित है। स्थिति तेजी से बदल सकती है।)
