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पुतिन की ‘कमर’ तोड़ रहे जेलेंस्की! रूसी तेल ठिकानों पर यूक्रेन के भीषण ड्रोन हमले, 40% एक्सपोर्ट क्षमता ठप

पुतिन की ‘कमर’ तोड़ रहे जेलेंस्की! रूसी तेल ठिकानों पर यूक्रेन के भीषण ड्रोन हमले, 40% एक्सपोर्ट क्षमता ठप

कीव/मास्को: रूस-यूक्रेन युद्ध अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां यूक्रेन सीधे तौर पर रूस की अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन यानी ‘तेल इंडस्ट्री’ पर प्रहार कर रहा है। मार्च 2026 के आखिरी हफ्ते में यूक्रेन ने रूसी तेल रिफाइनरियों और एक्सपोर्ट टर्मिनलों पर अब तक के सबसे घातक ड्रोन हमले किए हैं। इन हमलों ने न केवल रूसी तेल क्षेत्र को हिला दिया है, बल्कि राष्ट्रपति पुतिन के लिए एक बड़ा आर्थिक संकट भी खड़ा कर दिया है।

1. रूस के ‘सबसे सुरक्षित’ पोर्ट्स अब आग के हवाले

यूक्रेनी ड्रोन्स ने रूस के उन इलाकों को निशाना बनाया है जिन्हें अब तक सुरक्षित माना जाता था:

* उस्त-लुगा (Ust-Luga) और प्रिमोर्स्क (Primorsk): बाल्टिक सागर स्थित ये रूस के दो सबसे बड़े तेल निर्यात केंद्र हैं। हालिया हमलों में इन बंदरगाहों के फ्यूल रिजर्व और लोडिंग पियर को भारी नुकसान पहुंचा है।

* यारोस्लाव रिफाइनरी (Yaroslavl Refinery): मॉस्को के उत्तर-पूर्व में स्थित इस विशाल रिफाइनरी पर शनिवार (28 मार्च 2026) को ड्रोन हमला हुआ, जिससे वहां भीषण आग लग गई।

* किरीशी रिफाइनरी: रूस की 5 सबसे बड़ी रिफाइनरियों में शामिल इस प्लांट के मुख्य प्रोसेसिंग यूनिट्स को ड्रोन्स ने तबाह कर दिया है।

2. 40% तेल एक्सपोर्ट हुआ ‘ऑफलाइन’

रॉयटर्स और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की रिपोर्ट के अनुसार, इन हमलों का असर बेहद गंभीर है:

* क्षमता में गिरावट: यूक्रेन के लगातार हमलों के कारण रूस की तेल निर्यात क्षमता का लगभग 40% (करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन) हिस्सा फिलहाल बंद हो गया है।

* आर्थिक चोट: तेल से होने वाली आय रूस के युद्ध बजट का मुख्य स्रोत है। इस सप्लाई चेन के टूटने से रूस को हर महीने अरबों डॉलर का नुकसान होने का अनुमान है।

* टैंकरों की कतार: फिनलैंड की खाड़ी में रूसी तेल लेने आए कम से कम 50 टैंकर फिलहाल फंसे हुए हैं क्योंकि बंदरगाहों पर लोडिंग इंफ्रास्ट्रक्चर नष्ट हो गया है।

3. जेलेंस्की की ‘आंख के बदले आंख’ की रणनीति

यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने इन हमलों को जायज ठहराते हुए कहा है कि यह रूस द्वारा यूक्रेन के बिजली ग्रिडों पर किए गए हमलों का जवाब है।

* बदला: जेलेंस्की ने स्पष्ट किया कि जब तक रूस यूक्रेन के नागरिकों को अंधेरे और ठंड में रखेगा, यूक्रेन रूस के ‘पैसे छापने वाली मशीनों’ (तेल रिफाइनरियों) को निशाना बनाता रहेगा।

* रूस की जवाबी कार्रवाई: बौखलाए रूस ने भी यूक्रेन पर एक ही रात में 442 ड्रोन्स दागे हैं, जिनमें से अधिकतर को यूक्रेनी वायुसेना ने मार गिराया।

4. रूस में पेट्रोल-डीजल का संकट?

लगातार रिफाइनरियों के जलने से रूस के घरेलू बाजार में भी ईंधन की कमी की खबरें आ रही हैं। जानकारों का कहना है कि अगर ये हमले जारी रहे, तो रूस को अपनी सेना और जनता के लिए पेट्रोल-डीजल बचाने के लिए एक्सपोर्ट पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों की राय: रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेन ने अब “इकोनॉमिक वॉरफेयर” (आर्थिक युद्ध) शुरू कर दिया है। पुतिन के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब अपनी रिफाइनरियों को इन सस्ते लेकिन सटीक ड्रोन्स से बचाना है।

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