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शहीद दिवस: एक साल, तीन नमन; आज भगत-राजगुरु-सुखदेव की शहादत का दिन

आज 23 मार्च है, पूरा देश शहीद दिवस मना रहा है। यह दिन उन तीन नौजवानों के बलिदान की याद दिलाता है जिन्होंने इंकलाब का नारा बुलंद करते हुए फांसी के फंदे को चूम लिया था। लेकिन भारत की मिट्टी की रक्षा में जान देने वाले नायकों को याद करने के लिए साल में तीन खास मौके आते हैं।

शहीद दिवस: एक साल, तीन नमन; आज भगत-राजगुरु-सुखदेव की शहादत का दिन

नई दिल्ली: आज 23 मार्च 2026 को पूरा भारत महान क्रांतिकारी भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को नमन कर रहा है। 1931 में आज ही के दिन ब्रिटिश हुकूमत ने लाहौर जेल में इन तीनों वीरों को फांसी दी थी। उनकी शहादत ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में वो चिंगारी फूंकी, जिसने अंततः अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया।

भारत में 3 बार मनाया जाता है शहीद दिवस: जानिए कब और क्यों?

भारत में ‘शहीद दिवस’ केवल एक तिथि तक सीमित नहीं है। देश अलग-अलग बलिदानों को याद करने के लिए साल में तीन प्रमुख दिन समर्पित करता है:

1. 30 जनवरी: राष्ट्रपिता की पुण्यतिथि

* महत्व: 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

* श्रद्धांजलि: बापू के अहिंसा और सत्य के मार्ग को याद करते हुए उनकी पुण्यतिथि को राष्ट्रीय स्तर पर शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री राजघाट पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

2. 23 मार्च: क्रांतिकारियों का सर्वोच्च बलिदान (आज का दिन)

* महत्व: 1931 में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को दी गई फांसी।

* प्रेरणा: मात्र 23-24 साल की उम्र में हंसते-हंसते जान कुर्बान करने वाले इन नायकों की याद में आज देशभर में ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारों के साथ कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। युवा पीढ़ी के लिए यह दिन शौर्य का प्रतीक है।

3. 21 अक्टूबर: पुलिस स्मृति दिवस

* महत्व: 1959 में लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स में चीनी सेना के हमले में 10 भारतीय पुलिस जवान शहीद हो गए थे।

* सम्मान: कर्तव्य पालन के दौरान प्राण न्यौछावर करने वाले पुलिसकर्मियों की याद में इसे ‘पुलिस शहीद दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। देश की सभी पुलिस फोर्स इस दिन अपने साथियों को सलामी देती हैं।

आज के दिन का विशेष महत्व

आज देशभर के स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी संस्थानों में दो मिनट का मौन रखा जा रहा है। पंजाब के खटकड़ कलां (भगत सिंह का पैतृक गांव) और हुसैनीवाला (जहां उनका अंतिम संस्कार हुआ था) में भारी संख्या में लोग जुट रहे हैं। सोशल मीडिया पर #ShaheedDiwas ट्रेंड कर रहा है, जहाँ लोग इन अमर बलिदानियों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त कर रहे हैं।

भगत सिंह के शब्द: “वे मुझे मार सकते हैं, लेकिन वे मेरे विचारों को नहीं मार सकते। वे मेरे शरीर को कुचल सकते हैं, लेकिन वे मेरी आत्मा को कुचलने में सक्षम नहीं होंगे।”

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