अन्तर्राष्ट्रीय

परमाणु युद्ध की आहट? डिमोना पर हमले से क्यों कांप उठी दुनिया

इजरायल और ईरान के बीच जारी भीषण संघर्ष में डिमोना (Dimona) का नाम आने से पूरी दुनिया में हड़कंप मच गया है। 21 मार्च 2026 को हुए ईरानी मिसाइल हमलों के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या मिडिल ईस्ट अब एक परमाणु युद्ध (Nuclear War) की कगार पर है।

यहाँ जानिए कि डिमोना आखिर क्या है और वहां मिसाइल गिरना इतनी बड़ी बात क्यों है।

परमाणु युद्ध की आहट? डिमोना पर हमले से क्यों कांप उठी दुनिया

तेल अवीव/तेहरान: ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग अब अपने सबसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। हाल ही में ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों ने दक्षिण इजरायल के डिमोना शहर को निशाना बनाया, जहां इजरायल का सबसे गुप्त और महत्वपूर्ण परमाणु केंद्र स्थित है।

डिमोना: इजरायल का वो ‘राज’ जिसे छूना मना है

डिमोना में स्थित ‘शimon पेरेस नेगेव न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर’ को इजरायल की परमाणु शक्ति का गढ़ माना जाता है। हालांकि इजरायल ने कभी आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया, लेकिन दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि:

* परमाणु हथियारों का स्रोत: इसी केंद्र में इजरायल के परमाणु बम तैयार किए गए हैं।

* अजेय सुरक्षा कवच: यह दुनिया के सबसे सुरक्षित ठिकानों में से एक है, जिसकी सुरक्षा के लिए इजरायल का ‘एरो’ और ‘पैट्रियट’ डिफेंस सिस्टम तैनात रहता है।

* नो-फ्लाई ज़ोन: डिमोना के ऊपर से किसी भी विमान का उड़ना प्रतिबंधित है।

ईरानी मिसाइल गिरने से क्यों मची खलबली?

* रेड लाइन का पार होना: डिमोना पर हमला इजरायल के लिए सबसे बड़ी ‘रेड लाइन’ है। रणनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, डिमोना को निशाना बनाने का मतलब है कि ईरान अब सीधे इजरायल के वजूद (Deterrence) को चुनौती दे रहा है।

* रेडिएशन का खतरा: अगर मिसाइल सीधे परमाणु रिएक्टर पर गिरती, तो बड़े पैमाने पर रेडियोधर्मी रिसाव (Radiation Leak) हो सकता था, जिससे न केवल इजरायल बल्कि पड़ोसी देश भी प्रभावित होते।

* जवाबी कार्रवाई का डर: इजरायल की घोषित नीति रही है कि वह अपने अस्तित्व पर खतरे की स्थिति में किसी भी हद तक जा सकता है। डिमोना पर हमला इजरायल को ईरान के खिलाफ परमाणु विकल्प सोचने पर मजबूर कर सकता है।

ताजा हालात: IAEA की रिपोर्ट

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने हमले के बाद बयान जारी कर बताया कि फिलहाल परमाणु संयंत्र को कोई सीधा नुकसान नहीं पहुंचा है और रेडिएशन का स्तर सामान्य है। हालांकि, ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका और इजरायल ने तेहरान में ‘सत्ता परिवर्तन’ (Regime Change) की कोशिश की, तो उसकी अगली मिसाइलें सीधे रिएक्टर को निशाना बनाएंगी।

महत्वपूर्ण तथ्य: डिमोना की स्थापना 1950 के दशक में फ्रांस की मदद से की गई थी। यह इजरायल के नेगेव रेगिस्तान में स्थित है ताकि इसे बाहरी दुनिया की नजरों से दूर रखा जा सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *