राजनीति

ओवैसी-हुमायूं का हाथ: क्या बंगाल में बिगड़ेगा ममता का खेल?

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM और पूर्व टीएमसी नेता हुमायूं कबीर की ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ (AJUP) ने हाथ मिला लिया है। यह गठबंधन सीधे तौर पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाने की तैयारी में है।

यहाँ जानिए इस ‘जोड़ी’ के सियासी समीकरण और ममता बनर्जी पर इसके संभावित असर के बारे में:

ओवैसी-हुमायूं का हाथ: क्या बंगाल में बिगड़ेगा ममता का खेल?

कोलकाता: 2026 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पश्चिम बंगाल में ‘तीसरे मोर्चे’ की सुगबुगाहट तेज हो गई है। हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने आधिकारिक तौर पर हुमायूं कबीर की पार्टी के साथ गठबंधन का ऐलान कर दिया है। हुमायूं कबीर, जो कभी ममता बनर्जी के करीबी थे, अब उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभर रहे हैं।

गठबंधन की बड़ी बातें

* सीटों का गणित: हुमायूं कबीर की पार्टी बंगाल की 294 सीटों में से 182 सीटों पर चुनाव लड़ने का मन बना चुकी है, जिसमें AIMIM को करीब 8 से 10 महत्वपूर्ण सीटें दी जा सकती हैं।

* हाई-प्रोफाइल मुकाबला: इस गठबंधन ने ममता बनर्जी के खिलाफ भवानीपुर सीट पर पूनम बेगम को उतारकर सीधे मुख्यमंत्री को चुनौती दी है। इसके अलावा नंदीग्राम में भी उम्मीदवार उतारने की घोषणा की गई है।

* मुस्लिम वोट बैंक पर नजर: बंगाल में करीब 30% मुस्लिम मतदाता हैं, जो अब तक टीएमसी का मजबूत किला रहे हैं। ओवैसी और कबीर की जोड़ी मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर 24 परगना जैसे जिलों में सेंध लगा सकती है।

क्या ममता बनर्जी का कुछ बिगाड़ पाएंगे?

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, इस गठबंधन के दो सीधे परिणाम हो सकते हैं:

* वोटों का ध्रुवीकरण: यदि मुस्लिम वोट बंटते हैं, तो इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिल सकता है। टीएमसी पहले भी ओवैसी को बीजेपी की ‘B-टीम’ कहती रही है।

* मुर्शिदाबाद का फैक्टर: हुमायूं कबीर का मुर्शिदाबाद बेल्ट में काफी प्रभाव है। अगर वह वहां टीएमसी के वोटों को काटने में सफल रहे, तो ममता बनर्जी को बहुमत के आंकड़े तक पहुँचने में पसीने छूट सकते हैं।

* धार्मिक कार्ड: हुमायूं कबीर ने ‘बाबरी मस्जिद’ की तर्ज पर मस्जिद बनाने जैसे बयानों से कट्टरपंथी मतों को लुभाने की कोशिश की है, जो टीएमसी की ‘सेकुलर’ छवि के लिए खतरा है।

ममता की रणनीति

ममता बनर्जी इस खतरे से अनजान नहीं हैं। टीएमसी अब स्थानीय स्तर पर ‘बंगाली बनाम बाहरी’ का कार्ड खेल रही है, ओवैसी को ‘हैदराबादी नेता’ बताकर उनकी स्वीकार्यता कम करने की कोशिश जारी है।

हुमायूं कबीर का दावा: “अगर हम सत्ता में आए तो बंगाल को पहला मुस्लिम मुख्यमंत्री देंगे। अगर नहीं भी आए, तो हमारे बिना बंगाल में किसी की सरकार नहीं बनेगी।”

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