ईरान-अमेरिका वार्ता बेनतीजा: इस्लामाबाद से खाली हाथ लौटा प्रतिनिधिमंडल, क्या अब युद्ध ही अंतिम विकल्प?
इस्लामाबाद/तेहरान, 25 अप्रैल 2026: ईरान और अमेरिका के बीच चल रही शांति वार्ता में नया मोड़ आ गया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के नेतृत्व में ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंचा था, लेकिन दूसरे दौर की प्रत्यक्ष वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई। प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान से वापस लौट गया है। अब दोनों देशों के बीच स्थायी युद्धविराम और समझौते के लिए अप्रत्यक्ष वार्ता (indirect talks) ही एकमात्र विकल्प बचा दिख रहा है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस्लामाबाद में हुई बैठकें तनावपूर्ण रहीं। अमेरिकी पक्ष ने ईरान पर दबाव बनाते हुए कहा कि तेहरान को उनके प्रस्तावों को स्वीकार करना चाहिए, जबकि ईरान ने किसी भी तरह की धमकी या दबाव में बातचीत से इनकार कर दिया। ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि वे धमकी के साए में कोई समझौता नहीं करेंगे।
क्या हुआ इस्लामाबाद में?
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची शुक्रवार रात इस्लामाबाद पहुंचे।
अमेरिकी पक्ष की ओर से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जैरेड कुशनर वार्ता के लिए तैयार थे।
बैठकें हुईं, लेकिन दोनों पक्षों के बीच मुख्य मुद्दों — परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल क्षमता, क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों और प्रतिबंध हटाने — पर सहमति नहीं बन सकी।
पहले दौर की वार्ता (11-12 अप्रैल) भी बिना नतीजे के खत्म हुई थी। अब दूसरे दौर में भी यही स्थिति बनी रही।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अराघची इस्लामाबाद के बाद ओमान और रूस की यात्रा पर जा रहे हैं, जहां वे क्षेत्रीय शांति और युद्धविराम के प्रयासों पर चर्चा करेंगे।
अब बचा सिर्फ एक रास्ता
विश्लेषकों का मानना है कि प्रत्यक्ष (direct) वार्ता में बार-बार असफलता के बाद अब ओमान की मध्यस्थता में अप्रत्यक्ष वार्ता ही सबसे व्यवहारिक रास्ता बच गया है। ओमान पहले भी दोनों देशों के बीच पुल का काम कर चुका है।
ईरान का रुख: कोई भी समझौता सम्मानजनक और बिना दबाव के होना चाहिए।
अमेरिका का रुख: ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम पर बड़े पैमाने पर समझौता करना होगा, अन्यथा सैन्य विकल्प खुला रहेगा।
पाकिस्तान की भूमिका: पाकिस्तान दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसकी मध्यस्थता अब सीमित होती दिख रही है।
पृष्ठभूमि
यह तनाव 2026 की ईरान-अमेरिका-इजराइल संघर्ष के बाद बढ़ा है, जिसमें कुछ हफ्तों तक युद्ध की स्थिति बनी रही। फिलहाल एक अस्थायी युद्धविराम (ceasefire) लागू है, लेकिन इसे स्थायी बनाने के लिए समय सीमा तेजी से समाप्त हो रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल निर्यात और क्षेत्रीय सुरक्षा भी बड़े मुद्दे बने हुए हैं।
दोनों देशों के बीच अब ओमान या किसी तीसरे देश की मध्यस्थता में अप्रत्यक्ष बातचीत ही शांति की अंतिम उम्मीद दिख रही है। अगर यह भी फेल हो गई तो मध्य पूर्व में फिर से तनाव बढ़ने की आशंका है।
पाकिस्तान, ओमान और अन्य मध्यस्थ देश अभी भी प्रयास जारी रखे हुए हैं। आने वाले दिनों में स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
(घटनाक्रम 25 अप्रैल 2026 तक की रिपोर्ट्स पर आधारित। स्थिति तेजी से बदल रही है।)
