तेलंगाना में सियासी भूचाल: के. कविता ने लॉन्च की नई पार्टी ‘TRS’, पिता की राह से अलग होकर ठोकेंगी चुनावी ताल
तेलंगाना की राजनीति में एक बड़ा धमाका हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (KCR) की बेटी के. कविता ने अपने पिता की पार्टी से अलग होकर अपनी नई राजनीतिक राह चुन ली है। शनिवार को उन्होंने हैदराबाद में अपनी नई पार्टी ‘तेलंगाना राष्ट्र सेना’ (TRS) के गठन का औपचारिक ऐलान किया।
यहाँ इस सियासी बदलाव की पूरी रिपोर्ट दी गई है:
तेलंगाना में सियासी भूचाल: के. कविता ने लॉन्च की नई पार्टी ‘TRS’, पिता की राह से अलग होकर ठोकेंगी चुनावी ताल
हैदराबाद: तेलंगाना की राजनीति में शनिवार को उस वक्त एक नया मोड़ आ गया जब के. कविता ने अपनी नई पार्टी ‘तेलंगाना राष्ट्र सेना’ (TRS) के गठन की घोषणा की। दिलचस्प बात यह है कि कविता ने अपनी पार्टी के लिए वही नाम चुना है, जो कभी उनके पिता की पार्टी (तेलंगाना राष्ट्र समिति – TRS) की पहचान हुआ करता था। 2022 में केसीआर ने अपनी पार्टी का नाम बदलकर भारत राष्ट्र समिति (BRS) कर लिया था, और अब कविता ने उसी ‘ब्रैंड’ को नए स्वरूप में अपना लिया है।
क्यों और कैसे हुआ BRS से मोहभंग?
कविता और उनके पिता के बीच की राजनीतिक दूरियाँ पिछले साल जगजाहिर हो गई थीं:
निलंबन की वजह: सितंबर 2025 में कविता को BRS से निलंबित कर दिया गया था।
गंभीर आरोप: कविता ने अपने चचेरे भाई टी. हरीश राव और रिश्तेदार जे. संतोष कुमार पर आरोप लगाया था कि उन्होंने कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना के बहाने केसीआर की छवि को नुकसान पहुँचाया है। इसी अंदरूनी कलह के चलते उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया था।
सामाजिक सेवा से राजनीतिक रण तक
निलंबन के बाद कविता शांत नहीं बैठीं। उन्होंने अपने संगठन ‘तेलंगाना जागृति’ के माध्यम से जनता के बीच अपनी सक्रियता बनाए रखी। अब नई पार्टी के गठन के साथ उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वे तेलंगाना की सत्ता के रण में सीधे तौर पर उतरने के लिए तैयार हैं।
के. कविता: एक आक्रामक राजनीतिक सफर
सांसद का अनुभव: 2014 में निजामाबाद लोकसभा सीट से सांसद चुनकर कविता ने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी धाक जमाई थी।
सक्रियता: बाद में वे राज्यसभा सदस्य भी बनीं और उन्हें एक स्पष्टवादी और जमीनी मुद्दों को उठाने वाली नेता के रूप में पहचाना जाता है।
नया नाम, नई चुनौती: केसीआर की पार्टी का पुराना नाम अपनाकर कविता ने संकेत दे दिया है कि वे तेलंगाना के मूल गौरव और उस पुरानी विरासत पर अपना दावा ठोकना चाहती हैं, जिसे उनके पिता ने नेशनल पॉलिटिक्स (BRS) के चक्कर में छोड़ दिया था।
सियासी टकराव के आसार
कविता के इस कदम से तेलंगाना में BRS (बाप) बनाम TRS (बेटी) की स्थिति पैदा हो सकती है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि कविता का यह कदम BRS के वोट बैंक में बड़ी सेंध लगा सकता है, खासकर उन कार्यकर्ताओं के बीच जो आज भी पुरानी ‘TRS’ विचारधारा से जुड़े हुए हैं।
बड़ी बात: तेलंगाना राष्ट्र सेना (TRS) का पुनर्जीवित होना राज्य के आगामी चुनावों में त्रिकोणीय या चतुष्कोणीय मुकाबले को और भी रोचक बना देगा।
क्या आपको लगता है कि के. कविता अपने पिता की ‘पुरानी विरासत’ के नाम पर तेलंगाना की जनता का दिल जीत पाएंगी?
